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वही प्रेम है

वही प्रेम है

जो तुम्हारे भीतर
खिले फूलों को
तोड़ता न हो,
उन्हें सींचता हो —
वही प्रेम है।

जो तुम्हारी आवाज़ को
धीमा न करे,
बल्कि उसे
अपनी जगह दे —
वही प्रेम है।

जो तुम्हें बदलने की
जल्दी में न हो,
बल्कि तुम्हें
समझने की धैर्य में हो —
वही प्रेम है।

जो तुम्हारे सपनों पर
अपना नाम न लिखे,
बल्कि उन्हें
उड़ने का आसमान दे —
वही प्रेम है।

जो तुम्हारी चुप्पियों को
सवाल न बनाए,
उन्हें सुन सके —
वही प्रेम है।

जो तुम्हें छोटा करके
खुद बड़ा न हो,
बल्कि तुम्हारे साथ
बराबर खड़ा हो —
वही प्रेम है।

जो भीतर के बाग़ को
सुरक्षित रखे,
और हर मौसम में
तुम्हें खिलने दे —
वही प्रेम है।

✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा

कविता का भावार्थ

यह कविता प्रेम को अधिकार या स्वामित्व के रूप में नहीं, बल्कि संरक्षण और विस्तार के रूप में प्रस्तुत करती है। सच्चा प्रेम वह है जो व्यक्ति की पहचान को कम नहीं करता, बल्कि उसे और गहराई से विकसित होने का अवसर देता है।

कवि यह संदेश देते हैं कि प्रेम में समानता, धैर्य और सम्मान आवश्यक हैं। जहाँ स्वतंत्रता सुरक्षित हो और आत्मा को खिलने का स्थान मिले, वहीं सच्चा प्रेम जन्म लेता है।


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जब मैं चलूँ

यह कविता आत्ममूल्य और दृष्टिकोण के अंतर को दर्शाती है। जब इंसान खुद को कम आंकता है तो दुनिया भी वैसी ही लगती है, लेकिन खुद को समझते ही नजरिया बदल जाता है।

अपने आप से मत हारना

यह प्रेरणादायक कविता आत्मविश्वास, दुआ और आंतरिक शक्ति की बात करती है। यह याद दिलाती है कि दुनिया हमें तब तक नहीं हरा सकती, जब तक हम अपने आप से हार नहीं मानते।

पूरा जीवन

यह कविता जीवन को पूरी तरह जीने की प्रेरणा देती है। आधे-अधूरे सपनों से संतुष्ट होने के बजाय हर अनुभव, हर संघर्ष और हर खुशी को पूर्ण रूप से जीना ही सच्चा जीवन है।