
जब किस्मत बदलती है
जब किस्मत बदलती है,
तब मौसम बदलता है,
जो सूखा पड़ा था जीवन,
वो फिर से हरा-भरा लगता है।
जो रास्ते बंद लगते थे,
वो खुद ही खुल जाते हैं,
जो लोग मुंह मोड़ लेते थे,
वो फिर से लौट आते हैं।
जब किस्मत बदलती है,
तब नज़रिया बदलता है,
जो हार सा लगता था पहले,
वो भी अब सबक सा लगता है।
कल तक जो ठोकर थी,
वो आज सहारा बन जाती है,
हर गिरावट की कहानी
अब ताकत में ढल जाती है।
जब किस्मत बदलती है,
तब हालात बदलते हैं,
जो अंधेरे में छुपे थे सपने,
वो रोशनी में पलते हैं।
पर ये बदलाव यूँ ही नहीं,
हर आँसू की कीमत होती है,
हर जागी हुई रात के पीछे
एक नई सुबह होती है।
तू बस चलता जा
रुकना नहीं,
क्योंकि जो ठहर गया —
वो बदलता नहीं।
क्योंकि
जब किस्मत बदलती है,
तब मौसम बदलता है —
और वही इंसान
एक दिन
दुनिया बदलता है…
✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा
कविता का भावार्थ
यह कविता जीवन में बदलाव और संघर्ष के महत्व को दर्शाती है। कवि बताते हैं कि जब इंसान लगातार प्रयास करता है, तब एक समय ऐसा आता है जब उसकी किस्मत बदलती है और उसके साथ उसके हालात भी बदल जाते हैं।
कविता में “मौसम बदलना” एक प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि कठिन समय हमेशा स्थायी नहीं होता। मेहनत और धैर्य के बाद ही जीवन में उजाला आता है।
कवि श्रीकांत शर्मा की यह रचना प्रेरणा देती है कि इंसान को रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि निरंतर प्रयास ही उसे उस मुकाम तक पहुँचाता है जहाँ वह अपनी किस्मत और दुनिया दोनों बदल सकता है।


