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दर्द का इलाज़

दर्द का इलाज

दर्द का इलाज
दर्द में ही है,
सुख में कहाँ है
इसका इलाज।

जिस अमृत को
तुम ढूँढ़ रहे हो,
वो दर्द में है —
सुख में कहाँ।

सुख तुम्हें
सिखाएगा नहीं,
दर्द ही देगा
दवा जीवन का।

इसे अपनाए बिना
जीवन कहाँ…

सुख तो बस
एक ठहराव है,
जो कुछ पल
बहला देता है,

पर दर्द —
तुम्हें बदल देता है,
अंदर से
गढ़ देता है।

जिसने दर्द सहा है,
वही समझ पाया है,
जीवन का असली अर्थ
क्या होता है।

दर्द तुम्हें
तोड़ता नहीं,
तुम्हें बनाता है,
तुम्हें तुम्हारे ही
और करीब लाता है।

जिस रास्ते से
तुम भागते हो,
वही रास्ता
तुम्हें मजबूत करता है।

दर्द एक दर्पण है,
जो तुम्हें
तुम्हारा असली चेहरा दिखाता है,

जहाँ कोई दिखावा नहीं,
कोई झूठ नहीं —
बस तुम होते हो,
और तुम्हारा सत्य।

सुख तुम्हें
सोने देता है,
दर्द तुम्हें
जगाता है।

और जो जाग गया —
वही जीना सीख गया।

तो मत भाग
इससे,
मत छुप
इसके पीछे —

दर्द का इलाज
दर्द में ही है…

क्योंकि
जिसे तुम ज़हर समझते हो,
वही अमृत बनता है —

जब तुम उसे
स्वीकार कर लेते हो…

✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा

कविता का भावार्थ

यह कविता दर्द को जीवन के सबसे बड़े शिक्षक के रूप में प्रस्तुत करती है। कवि बताते हैं कि सुख केवल क्षणिक आराम देता है, लेकिन असली परिवर्तन और समझ दर्द के अनुभव से ही आती है।

“दर्द का इलाज दर्द में ही है” यह पंक्ति एक गहरे दर्शन को दर्शाती है, जहाँ दर्द को नकारने के बजाय उसे स्वीकार करना ही जीवन की सच्ची प्रगति का मार्ग बनता है।

कवि श्रीकांत शर्मा की यह रचना पाठक को यह समझाती है कि कठिन अनुभव ही व्यक्ति को मजबूत बनाते हैं और उसे अपने वास्तविक स्वरूप से परिचित कराते हैं।


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