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दिव्य योजना

दिव्य योजना

हर चीज़
किसी न किसी कारण से होती है।

जो तुम्हें टूटता दिखता है,
वो शायद
नई दिशा का जन्म होता है।

कुछ भी यूँ ही
संयोग से नहीं होता।
वक़्त की चाल
अक्सर समझ से बाहर होती है,
पर व्यर्थ नहीं होती।

तुम जिसे देर कहते हो,
वो शायद तैयारी हो।
तुम जिसे हार कहते हो,
वो शायद मोड़ हो।

ईश्वर
शोर में काम नहीं करता,
वो खामोशी में
रास्ते बदल देता है।

कई बार
वो छीनता नहीं —
हल्का करता है।

कई बार
वो गिराता नहीं —
झुकना सिखाता है।

तुम बस
इतना सीख लो —
हर सवाल का जवाब
तुरंत नहीं मिलता।

पर हर जवाब
आता ज़रूर है।

उसकी योजना
हमारी समझ से बड़ी है।
हमारी जल्दी से गहरी है।
हमारी आशंका से शांत है।

इसलिए
डर कर मत रुको।
गुस्से में मत टूटो।

जहाँ वह तुम्हें ले जाए,
विश्वास के साथ चलो।

क्योंकि जब
तुम्हें रास्ता दिखाई नहीं देता,
तब भी
वो तुम्हें देख रहा होता है।

✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा

कविता का भावार्थ

यह कविता जीवन की अनिश्चितताओं को दिव्य दृष्टि से देखने का संदेश देती है। कवि बताते हैं कि जो घटनाएँ हमें कठिन या अनुचित लगती हैं, वे भी किसी बड़े उद्देश्य का हिस्सा हो सकती हैं।

विश्वास, धैर्य और समर्पण के माध्यम से मनुष्य हर परिस्थिति में अर्थ खोज सकता है। जब हम परिणाम को नियंत्रित करने की जगह भरोसा करना सीखते हैं, तब जीवन की राह सरल और शांत हो जाती है।


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