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कामयाबी

कामयाबी

जो लोग कामयाब नहीं होते,
उनकी बातें भी
लोग अनसुनी कर देते हैं,
क्योंकि उनमें
समर्पण नहीं होता।

और ये दुनिया
कामयाब लोगों की है,
कामयाबी समर्पण माँगती है,
और समर्पण —
एक अनुशासन है,
जो आसान नहीं होता।

रीढ़ की हड्डी जलानी होती है
इसको पाने के लिए,
तभी
कामयाबी आती है…

✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा

कविता का भावार्थ

यह कविता जीवन में सफलता प्राप्त करने के वास्तविक सिद्धांतों को उजागर करती है। कवि बताते हैं कि केवल इच्छा रखने से कामयाबी नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए समर्पण और अनुशासन आवश्यक होता है।

कविता में “समर्पण” और “अनुशासन” को सफलता की नींव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह दर्शाता है कि जो व्यक्ति लगातार मेहनत और त्याग करता है, वही अंततः अपनी पहचान बना पाता है।

कवि श्रीकांत शर्मा की यह रचना पाठक को प्रेरित करती है कि वह कठिनाइयों से भागने के बजाय उन्हें स्वीकार करे, क्योंकि वही संघर्ष उसे सफलता तक पहुँचाता है।


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