
कोशिश का साहस
निश्चित नहीं जीत हर बार,
कोशिश करने में क्या जाता है।
हार के डर से किनारे बैठ
क्यों ख़्वाबों को भरमाता है?
राह कठिन हो तो क्या डरना,
चलते-चलते राह बन जाती है।
जो ठहर गया डर के कारण,
उसकी दुनिया थम जाती है।
कोशिश कर — जीत मिलेगी,
एक दिन तू शिखर चढ़ जाएगा।
मेहनत की लौ जलाए रख,
अंधेरा भी झुक जाएगा।
नहीं किया अगर तूने प्रयास,
तो मन ही मन पछताएगा।
डर के साये में जीता रहा
तो यूँ ही जीवन बिताएगा।
सतरंगी इंद्रधनुष भी देखेगा,
जब तू बादल चीर जाएगा।
तेरी कोशिश की चमक से
तेरा ही जग इतराएगा।
फिर मुस्कुराएगा जीवन तेरा,
हर मुश्किल दूर हो जाएगी।
बस कोशिश करते रहना —
मंज़िल खुद पास आ जाएगी।
✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा
कविता का भावार्थ
यह कविता प्रयास और साहस के महत्व को उजागर करती है। जीवन में सफलता हमेशा तुरंत नहीं मिलती, लेकिन लगातार प्रयास करने वाला व्यक्ति अंततः अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता है।
कवि यह संदेश देते हैं कि असफलता का डर ही सबसे बड़ी बाधा है। जो व्यक्ति प्रयास करना नहीं छोड़ता, वही कठिनाइयों को पार करके जीवन में सच्ची सफलता और संतोष प्राप्त करता है।




