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काफ़ी आवारा है

काफ़ी आवारा है

काफ़ी आवारा है,
एक ख़्वाब
जो हमारा है,
काफ़ी आज़ाद है,
ये बेइंतहा प्यार,
जो हमारा है…

✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा

कविता का भावार्थ

यह कविता एक ऐसे ख़्वाब की बात करती है जो सीमाओं में बंधा नहीं है। “आवारा” शब्द यहाँ भटकाव नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का प्रतीक है। यह वह सपना है जो सामाजिक परिभाषाओं और बंधनों से परे, दिल की सच्ची चाहत से जन्म लेता है।

इसी प्रकार “बेइंतहा प्यार” उस भावना को दर्शाता है जो किसी शर्त, भय या सीमा में कैद नहीं होती। यह प्रेम खुली हवा की तरह है — जितना मुक्त, उतना गहरा। कविता बताती है कि जब ख़्वाब और प्यार दोनों आज़ाद हों, तब जीवन अपनी सबसे सच्ची अभिव्यक्ति में खिलता है।


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