
ज़िंदगी की राह और हौसले का सफर
ज़िंदगी की राह में
चलना है तो थकान भी होगी,
रास्तों में तूफ़ान भी होंगे।
पर जो दिल में जज़्बा रखता है,
वो काँटों में भी फूल चुनता है।
अँधेरों से डरो मत तुम,
ये सुबह का पैगाम बताते हैं।
जो डगमगाकर क़दमों को संभाले,
वे ही मंज़िलों तक जाते हैं।
ज़िंदगी एक नदी की तरह है,
बहना ही इसका धर्म है;
जो ठहर गया, वही मर गया।
✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा
कविता का भावार्थ
यह कविता जीवन के संघर्षमय मार्ग को प्रेरणात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। कवि बताते हैं कि थकान, तूफ़ान और कठिनाइयाँ जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया हैं। जो व्यक्ति अपने भीतर दृढ़ निश्चय और जज़्बा बनाए रखता है, वही कठिन परिस्थितियों में भी अवसर और सकारात्मकता खोज लेता है।
अंधेरा यहाँ निराशा का प्रतीक है, जबकि सुबह आशा का संकेत देती है। जो व्यक्ति गिरकर संभलना सीखता है, वही अंततः सफलता तक पहुँचता है। अंतिम पंक्तियाँ जीवन को बहती नदी के समान बताती हैं — निरंतर आगे बढ़ना ही उसका स्वभाव है; ठहराव ही पतन है।


