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कर्म की गढ़री

कर्म की गढ़री बांध के
जग में फिरे इंसान,
जैसा करे, वैसा भरे,
विधि का यही विधान…

भिखारी – हिंदी कहानी

मुल्ला नसरुद्दीन अक्सर मजाक-मजाक में बड़ा सबक सिखा देते थे। एक दिन एक भिखारी मुल्ला नसरुद्दीन के घर के सामने आया। मुल्ला नसरुद्दीन आराम से पहली मंजिल पर बैठ कर चाय पी रहे थे। मुल्ला जी को देखकर भिखारी बोला, “अरे जनाब जरा नीचे आइए आपसे कुछ काम है।”

मुल्ला नसरुद्दीन भिखारी से बोले, “क्या काम है नीचे से ही बता दो।” भिखारी ने कहा, “आपको नीचे ही आना पड़ेगा।”

मुल्ला नसरुद्दीन नीचे चले आए और बोले बताओ क्या काम है? भिखारी ने कहा, “दो पैसे दे दो मालिक, मैं बहुत गरीब हूं।” मुल्ला नसरुद्दीन भिखारी पर खीजते हुए बोले ऊपर आओ। भिखारी पैसों के लालच में मुल्ला नसरुद्दीन के पीछे-पीछे चल दिया। ऊपर जाकर मुल्ला नसरुद्दीन भिखारी से बोले “मेरे पास एक भी पैसा नहीं है।” अबकी बार खीजने के बारी भिखारी की थी। बेचारा अपना-सा मुंह लेकर वहां से चला आया।

कहानी से सीख – हमें दूसरों के समय की कद्र करनी चाहिए न कि सिर्फ अपने स्वार्थ के बारे में सोचना चाहिए।

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