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विशेष कलाकार

रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

चुप कराए गए सच

चुप कराए गए सच

सच अब
धीरे बोलता है,
क्योंकि झूठ
माइक लेकर खड़ा है।

सच को
साबित होना पड़ता है,
झूठ को
बस दोहराया जाना होता है।

सच
तथ्यों में चलता है,
झूठ
नारों में दौड़ता है।

सच
धीरे-धीरे पहुँचता है,
झूठ
तेज़ी से फैलता है।

कभी अख़बार
सवाल पूछते थे,
अब हेडलाइन
निर्णय सुना देती है।

कभी खबर
जानकारी होती थी,
अब खबर
मत बन जाती है।

सच के पास
कागज़ होते हैं,
झूठ के पास
माइक।

और माइक
हमेशा ज़्यादा ऊँचा बोलता है।

भीड़
आवाज़ की तरफ़ जाती है,
सच्चाई की तरफ़ नहीं।

इसलिए
सच अब
धीरे बोलता है।

क्योंकि उसे पता है —
इतिहास
शोर नहीं सुनता,
सिर्फ़ सच्चाई याद रखता है।

और झूठ
जितना भी ऊँचा बोले,
अंत में
खामोशी में गिरता है।

✍️ कवि — श्रीकांत शर्मा

कविता का भावार्थ

यह कविता आधुनिक मीडिया और सूचना के दौर में फैलते शोर और प्रचार की संस्कृति पर प्रश्न उठाती है। जब झूठ को बार-बार दोहराया जाता है, तो वह अधिक तेज़ और प्रभावशाली दिखाई देता है।

कवि संकेत देते हैं कि सच्चाई को अक्सर समय और धैर्य की आवश्यकता होती है। इतिहास अंततः शोर नहीं, बल्कि तथ्य और सत्य को ही याद रखता है।


फ्रेश चुटकुले



ईश्वर की भाषा

मौन ईश्वर की भाषा है, इसको सुनने के लिए मौन होना होता है, शोर में दब जाती है, ईश्वर की आवाज़, तुम्हारा बदलाव, शोर में आएगा नहीं, मौन की भाषा सीखनी होगी सुनने और समझने के लिए, जीवन को बदलने के लिए…- श्रीकांत शर्माकौवों की गिनती - हिंदी कहानीतेनालीराम की बुद्धिमता और हाजिर...

करोड़ों खामियाँ

यह भावपूर्ण कविता खामियों और प्रयासों के बीच का अंतर दिखाती है। यह बताती है कि जो व्यक्ति कोशिश करता है, उसमें गलतियाँ भी होती हैं, और वही गलतियाँ उसके अनुभव और सफर की पहचान बनती हैं।


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