back to top
होमकविता

कविता

मोड़

किधर जाता है जीवन को छोड़ तेरी इस राह के हर किनारे पर है मोड़, मुड़ जा नहीं तो खो जायेगा फिर अपनी करनी...

प्रेम

तेरी आँखो में मैंने पहचाना है खुद को अजनबी नहीं तुम ये माना है तुमको,सम्पूर्ण जीवन समर्पित तन मन सब है तुम्हारा तुम...

कोशिश

निश्चित नहीं जीत हर बार कोशिश करने में क्या जाता है, हार के डर से, किनारे बैठ क्यों ख्वाबो को भरमाता है,कोशिश कर...

नशा हो या प्यार

नशा हो या प्यार हो आखिर में बर्बाद ही करेगा, बिना मंजिल की राह अगर हो, आखिर में, जीवन को तार-तार करेगा…- श्रीकांत...

अलग रास्ता

मैं कभी भीड़ में नहीं चला मुझे मालूम था मैं उसमे कभी चल ना पाउँगा, उस गुथम-गुथे में, दब जाएगी मेरी चाल तभी मैंने...

झूठ

झूठ आज इस मक़ाम पर ऐसे नहीं पंहुचा, क्युकी सत्य चलता है बहुत धीरे, उसके चाहने वाले होते है कमझूठ का तो बाजार...

लोकप्रिय लेख

error: Content is protected !!