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ख़त्म

खुद को ख़त्म भी कर दोगे तो भी,
दुनियां आपसे खुश नहीं होगी।

बूढ़ा और बच्चे की दोस्ती

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक बूढ़े आदमी नामक ‘रामु’ रहते थे। रामु बहुत ही सुखी और सामाजिक आदमी थे, लेकिन उनका कोई दोस्त नहीं था। वे हमेशा अकेले ही अपने घर में बैठे रहते थे और बच्चों के खेलते देखकर बड़े उदास रहते थे।

एक दिन, गाँव के पास की झील में रामु घूमने गए। वह झील के किनारे पर बैठकर जाल में फँसे मछलियों को देख रहे थे। तभी वह देखा, गाँव का एक 12 साल का लड़का उसी झील के किनारे पर आया।

लड़का रामु के पास आकर बोला, “नमस्ते, दादा! आप क्या कर रहे हैं?”

रामु बूढ़े मुँह से हंसकर बोले, “बेटा, मैं यहाँ मछलियों को देख रहा हूँ। वे कितनी खुशी से झूल रही हैं ना!”

लड़का झील की ओर देखकर बोला, “दादा, क्या आप मुझे मछलियों को पकड़ना सिखा सकते हैं?”

रामु खुशी-खुशी समझाने लगे, “हां बिल्कुल, बेटा! पर ध्यान से सुनो और सीखो।”

रामु ने लड़के को झूल बनाने का तरीका बताया और कुछ समय बाद वे दोनों मिलकर बड़ी सारी मछलियों को पकड़ने में कामयाब हो गए।

लड़का रामु को धन्यवाद कहकर वह अपने घर वापस चला गया, लेकिन वह रोज़ रामु के पास आता और उनके साथ वक्त बिताने लगा।

रामु और लड़का की दोस्ती गाँव में प्रसिद्ध हो गई। वे साथ में बहुत समय बिताते थे, और दोनों के बीच मजाक-मजाक में बहुत माजा आता था।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि दो अलग आयु के लोग भी एक-दूसरे के साथ अच्छे दोस्त बन सकते हैं। दोस्ती का कोई आयु नहीं होती, बस दिल से होनी चाहिए।

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