
क्या धरती सच में घूम रही है?
हम रोज़ चलते हैं, बैठते हैं, सोते हैं।
लेकिन हम जिस ज़मीन पर खड़े हैं, वह हर पल हज़ारों किलोमीटर प्रति घंटा की गति से घूम रही है।
फिर भी— हमें ज़रा भी हिलने का एहसास नहीं होता।
यह सवाल हमें अजीब क्यों लगता है?
जब कोई ट्रेन अचानक तेज़ होती है, तो शरीर पीछे झुक जाता है।
लिफ्ट ऊपर जाती है, तो पेट में हल्का सा दबाव महसूस होता है।
तो फिर धरती की इतनी तेज़ गति हमें क्यों नहीं महसूस होती?
यहाँ से शुरू होती है असली भौतिकी
धरती लगभग 1,670 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से अपने अक्ष पर घूमती है।
फिर भी यह गति हमें झटका नहीं देती।
क्योंकि समस्या गति नहीं, बल्कि गति में बदलाव से जुड़ी होती है।
हम क्या महसूस करते हैं?
हम स्थिर गति को महसूस नहीं करते।
हम केवल तब महसूस करते हैं जब गति तेज़ या धीमी होती है।
धरती की गति लगातार और समान है— इसलिए हमारा शरीर उसे महसूस नहीं करता।
यह समझ क्यों ज़रूरी है?
यह सवाल केवल जिज्ञासा नहीं, बल्कि भौतिकी की बुनियाद है।
यही सिद्धांत हवाई जहाज़, उपग्रह और अंतरिक्ष यात्राओं को संभव बनाता है।
अगले भाग में हम समझेंगे कि गुरुत्वाकर्षण और जड़त्व इस अनुभव को कैसे नियंत्रित करते हैं।

अगर धरती तेज़ है, तो हम गिर क्यों नहीं जाते?
यह सवाल सबसे ज़्यादा लोगों को उलझाता है।
अगर धरती हज़ारों किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घूम रही है, तो हम उछल क्यों नहीं जाते?
यहाँ काम करता है जड़त्व
भौतिकी में इसे जड़त्व (Inertia) कहा जाता है।
जड़त्व का अर्थ है— कोई भी वस्तु अपनी मौजूदा अवस्था को बनाए रखना चाहती है।
अगर आप स्थिर हैं, तो स्थिर रहना।
अगर आप गति में हैं, तो उसी गति में रहना।
ट्रेन का उदाहरण समझिए
जब ट्रेन समान गति से चल रही होती है, तो अंदर बैठे यात्री आराम से चलते-फिरते हैं।
उन्हें ट्रेन की गति महसूस नहीं होती।
लेकिन जैसे ही ट्रेन अचानक ब्रेक लगाती है, शरीर आगे की ओर झुक जाता है।
क्यों?
क्योंकि गति बदली।
धरती भी बिल्कुल यही करती है
धरती की गति अचानक नहीं बदलती।
वह न तेज़ होती है, न धीमी— कम से कम हमारे अनुभव के स्तर पर।
इसलिए हमारा शरीर उस गति को “नोटिस” ही नहीं करता।
अब आता है गुरुत्वाकर्षण
गुरुत्वाकर्षण हमें धरती से लगातार जोड़े रखता है।
यह हमें नीचे की ओर खींचता है, हर पल।
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, धरती का गुरुत्वाकर्षण बल घूर्णन से पैदा होने वाले केंद्रापसारक बल से कहीं अधिक शक्तिशाली है।
इसीलिए हम उड़ते नहीं, फिसलते नहीं, और सुरक्षित खड़े रहते हैं।
तो हमें कुछ भी क्यों महसूस नहीं होता?
क्योंकि—
• गति स्थिर है • जड़त्व हमें उसी गति में रखता है • गुरुत्वाकर्षण हमें पकड़े रखता है
इन तीनों का संतुलन हमें यह भ्रम देता है कि धरती स्थिर है।
अगले भाग में हम जानेंगे कि अगर धरती की गति थोड़ी भी बदल जाए, तो क्या होगा।

अगर धरती अचानक रुक जाए, तो क्या होगा?
अब ज़रा कल्पना कीजिए—
धरती अचानक घूमना बंद कर दे।
यहीं से भौतिकी डरावनी हो जाती है।
पहला असर: सब कुछ उड़ जाएगा
धरती की सतह, समुद्र, हवा, इमारतें— सब कुछ अपनी मौजूदा गति में आगे बढ़ जाएगा।
क्योंकि जड़त्व उन्हें रोकने नहीं देगा।
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि ऐसी स्थिति में हज़ारों किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से वस्तुएँ आगे बढ़ेंगी।
महासागर और हवा क्या करेंगे?
समुद्र विशाल सुनामी बन जाएंगे।
हवाएँ महाविनाशक तूफानों में बदल जाएँगी।
धरती पर जीवन कुछ ही मिनटों में असंभव हो जाएगा।
लेकिन ऐसा कभी क्यों नहीं होता?
क्योंकि धरती अचानक नहीं बदलती।
उसकी गति अरबों वर्षों से लगभग स्थिर है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि मानव शरीर धीमी और स्थिर गति के साथ खुद को आसानी से अनुकूलित कर लेता है।
हमें धरती की गति क्यों महसूस नहीं होती — अंतिम कारण
क्योंकि—
• हम धरती के साथ चल रहे हैं • गति में कोई अचानक बदलाव नहीं है • गुरुत्वाकर्षण हमें बाँधे रखता है • हमारा मस्तिष्क स्थिरता को प्राथमिकता देता है
यह सब मिलकर हमें यह एहसास दिलाते हैं कि धरती स्थिर है।
निष्कर्ष
धरती की गति एक याद दिलाती है—
कि स्थिरता हमेशा रुकने का नाम नहीं होती।
कभी-कभी सब कुछ तेज़ी से चल रहा होता है, फिर भी सब कुछ शांत लगता है।
यह विज्ञान का सबसे सुंदर सच है।

