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अनुशासन बिना जीत असंभव है

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बिना कष्‍ट अनुसासन को पाना भी असंभव है।

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हम बार-बार वही गलतियाँ क्यों दोहराते हैं? इसके पीछे छिपा दिमाग का खेल

कई बार हम जानते हैं कि हम गलती कर रहे हैं, फिर भी वही गलतियाँ बार-बार दोहराते हैं। आखिर दिमाग हमें क्यों नहीं रोक पाता? इसके पीछे छिपा मनोवैज्ञानिक कारण समझना बेहद जरूरी है।

रास्ते पर कंकड़

रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो तो भी एक अच्छा जूता पहनकर, उस पर चला जा सकता है...लेकिन अगर एक अच्छे जूते के अंदर कंकड़ हो तो, एक अच्छी सड़क पर भी कुछ कदम तक चलना मुश्किल हो जाता है।अथार्त - हम बहार की चुनौतियों से नहीं, बल्कि अंदर की कमजोरियों से हारते है।संगीतमय...

खामोशियाँ

कोई अपना भी था पर बहोत पहले, मैं बोलता भी था पर बहोत पहले, पर अब ये खामोशियाँ अच्छी है, खामोशियाँ जिसे अच्छी लग जाये, वो फिर बोला नहीं करते…दो सिर वाला जुलाहा - हिंदी कहानीबहुत समय पहले की बात है। एक गांव में मनोहर नाम का एक जुलाहा (कपड़े सिलने वाला) रहा करता...