
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ब्रह्मांड में हम रहते हैं उसका कोई अंत भी हो सकता है?
या फिर यह हमेशा अनंत रूप से फैलता ही रहेगा?
यह सवाल केवल दर्शन का नहीं है। आधुनिक विज्ञान भी आज इसी रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड सिर्फ मौजूद नहीं है, वह लगातार बदल रहा है।
जब हम रात के आकाश को देखते हैं, तो हमें तारे और आकाशगंगाएँ स्थिर लगती हैं।
लेकिन वास्तविकता यह है कि ये सभी वस्तुएँ तेज़ी से एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।
इस विचार को ब्रह्मांड का विस्तार कहा जाता है।
बीसवीं सदी में वैज्ञानिक एडविन हबल ने पाया कि जितनी दूर आकाशगंगा होती है, वह उतनी तेज़ी से दूर जा रही होती है।
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, यह विस्तार किसी विस्फोट का परिणाम नहीं, बल्कि स्वयं अंतरिक्ष के फैलने का संकेत है।
इसी खोज ने बिग बैंग सिद्धांत को जन्म दिया।
इस सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्मांड की शुरुआत एक अत्यंत सघन अवस्था से हुई थी।
लेकिन यहाँ एक गहरा सवाल उठता है।
अगर ब्रह्मांड फैल रहा है, तो वह किसमें फैल रहा है?
और क्या कहीं जाकर यह विस्तार रुक सकता है?
या फिर इसके आगे भी कुछ ऐसा है जिसे हम देख ही नहीं सकते?
इसी बिंदु से ब्रह्मांड के अंत का प्रश्न जन्म लेता है।
इस पहले भाग में हमने समझा कि ब्रह्मांड स्थिर नहीं, बल्कि एक गतिशील प्रक्रिया है।
अगले भाग में हम जानेंगे कि वैज्ञानिक ब्रह्मांड के अंत को लेकर कौन-कौन से सिद्धांत मानते हैं।

जब वैज्ञानिकों ने यह समझ लिया कि ब्रह्मांड फैल रहा है, तब अगला सवाल सामने आया।
यह विस्तार हमेशा चलेगा या कभी रुक भी सकता है?
पहला और सबसे चर्चित विचार है बिग फ्रीज़ का।
जलवायु अध्ययनों की तरह खगोल विज्ञान में भी इसे धीमी लेकिन निश्चित प्रक्रिया माना जाता है।
इस सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्मांड लगातार फैलता रहेगा।
आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से इतनी दूर हो जाएँगी कि प्रकाश भी उन तक नहीं पहुँच पाएगा।
नए तारे बनना बंद हो जाएँगे, पुराने तारे बुझते जाएँगे।
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, यदि डार्क एनर्जी स्थिर रही, तो ब्रह्मांड का अंत ठंडे अंधकार में होगा।
दूसरा विचार है बिग क्रंच।
इसके अनुसार, किसी समय विस्तार रुक सकता है और गुरुत्वाकर्षण सब कुछ वापस खींचने लगेगा।
आकाशगंगाएँ पास आएँगी, तारे टकराएँगे, और ब्रह्मांड खुद में सिमट जाएगा।
यह प्रक्रिया बिग बैंग का उलटा रूप मानी जाती है।
हालाँकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ जैसे वैज्ञानिक समुदाय मानते हैं कि वर्तमान डेटा इस सिद्धांत का समर्थन नहीं करता।
तीसरा और सबसे डरावना विचार है बिग रिप।
इसमें डार्क एनर्जी इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वह गुरुत्वाकर्षण को भी हरा देती है।
पहले आकाशगंगाएँ टूटेंगी, फिर तारे, फिर ग्रह, और अंत में परमाणु भी।
यहाँ तक कि समय और स्थान की संरचना भी बिखर सकती है।
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि यह स्थिति अत्यंत चरम डार्क एनर्जी पर निर्भर करती है।
इन तीनों सिद्धांतों में एक बात समान है।
ब्रह्मांड शाश्वत स्थिरता नहीं, बल्कि परिवर्तन की कहानी है।
अगले और अंतिम भाग में हम जानेंगे कि आधुनिक विज्ञान आज किस सिद्धांत को सबसे अधिक मानता है और इंसान का भविष्य इससे कैसे जुड़ा है।

आज के वैज्ञानिक तीनों संभावनाओं को जानते हैं।
लेकिन आधुनिक विज्ञान किस दिशा में झुकता है, यह सवाल सबसे अहम है।
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान डेटा बिग फ्रीज़ की ओर संकेत करता है।
डार्क एनर्जी स्थिर और लगातार ब्रह्मांड को फैला रही है।
इसका अर्थ यह नहीं कि अंत जल्द आएगा।
यह प्रक्रिया अरबों वर्षों में धीरे-धीरे घटेगी।
इंसानी सभ्यता इस समय सीमा की तुलना में एक पल से भी छोटी है।
लेकिन यह प्रश्न सिर्फ भविष्य का नहीं है।
यह सवाल हमारे वर्तमान को अर्थ देता है।
खगोल वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्मांड का अध्ययन हमें हमारी सीमाएँ और ज़िम्मेदारियाँ सिखाता है।
अगर ब्रह्मांड का अंत है, तो जीवन का मूल्य और गहरा हो जाता है।
और अगर अंत नहीं है, तो हमारी जिज्ञासा कभी समाप्त नहीं होगी।
शायद सबसे बड़ा सत्य यह नहीं कि ब्रह्मांड का अंत होगा या नहीं।
बल्कि यह कि हम इतने छोटे होकर भी इतने बड़े प्रश्न पूछ सकते हैं।
यही इंसान की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है।

