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सही समय और सही निर्णय

एक बार की बात है। किसी शहर में एक प्रोफेसर साहब अपने 25 साल के बेटे के साथ रहते थे। वह अपने बेटे की हमेशा कनफ्यूज्ड रहेने की आदत से बेहद परेशान थे।

उनका बेटा कभी भी सही समय पर कोई काम नहीं करता, कोई निर्णय नहीं ले पाता, इस वजह से कई बार उसकी नौकरी छूटती। लेकिन उसे यह बात समझ ही नहीं आती थी कि जीवन में सही निर्णय कब लिया जाये।

प्रोफेसर साहब हमेशा उससे कहा करते, यदि समय पर निर्णय नहीं लोगे, तो तुम्हें नुकसान उठाना पड़ेगा, लेकिन बेटे के कान पर जूं नहीं रेंगति।

एक दिन प्रोफेसर साहब को एक युक्ति सूझी। उन्होने अपने बेटे को अपने लैब में बुलाया। बेटा वहाँ पहुंचा, तो उसने देखा कि प्रोफेसर साहब ने एक मेंढक मँगवा रखा है।

उन्होने चूल्हे पर एक पतीले में पानी चढ़ाया और उसे उबलने दिया। पानी जब पूरा उबाल गया, तो उन्होने मेंढक को उस पानी में दाल दिया।

मेंढक को जैसे ही पानी गरम लगा, तो उसने तुरंत छलांग लगाई और खौलते पानी से बाहर आ गया। बेटे को कुछ समझ नहीं आया कि यह क्या हो रहा है।

प्रोफेसर साहब ने बेटे को बैठने और वहाँ जो भी कुछ हो रह है, देखते रहने का इशारा किया। अब उन्होने एक दूसरे पतीले में पानी लिया, उसमें उस मेंढक को डाल दिया और पानी को गरम करने लगे।

थोड़ी देर में पानी खौल गया, लेकिन मेंढक ने उस पानी से बाहर छलांग नहीं लगाया और कुछ देर में डूब कर मर गया। बेटे को यह सब देख कर आश्चर्य हुआ।

अब प्रोफेसर साहब ने उससे पूछा, बेटे, अब जरा बताओ कि पहले मेंढक ने बाहर छलांग लगा दी, लेकिन अब वह मर गया, इसका क्या कारण है?

बेटा कुछ समझ नहीं पाया। प्रोफेसर साहब ने कहा, पहले जब मेंढक को खौलते पानी में डाला गया, तो उसे पानी के गरम होने का अहसास हो गया और उसने छलांग लगा दी,

पर बाद में जैसे- जैसे पानी गरम होने लगा, मेंढक अपनी अंदरूनी ऊर्जा को खर्च कर स्वयं को उस पानी के लायक बनाता रहा और जब पानी पूरी तरह गरम हो गया, तब तक उस मेंढक के अंदर इतनी ऊर्जा नहीं बची थी कि वह बाहर छलांग लगा पाता, क्योंकि उसने अपनी सारी ऊर्जा खुद को पानी के तापमान के बराबर में खर्च कर दी थी।

यदि पानी के गरम होने की शुरुआत में वह मेंढक सही निर्णय लेकर छलांग लगा देता, तो उसकी यह ऊर्जा गयी नहीं होती, इसीलिए जीवन में सही समय पर आकलन कर सही निर्णय लेना बेहद आवश्यक है,

पिता की बात सुन कर बेटे की आंखों में चमक आ गयी, मानो उसे जीवन को देखने का एक नया नजरिया मिल गया हो।

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