back to top
होमसामान्य ज्ञानभांग: किसी के लिए नशा, किसी के लिए दवा




संबंधित पोस्ट

विशेष कलाकार

रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

भांग: किसी के लिए नशा, किसी के लिए दवा

भांग शायद दुनिया का सबसे विवादास्पद पौधा है। एक ही पदार्थ को कहीं नशा माना गया, कहीं पवित्र प्रसाद, और कहीं आधुनिक चिकित्सा की संभावनाओं से भरा औषधीय तत्व।

समस्या भांग में नहीं है—समस्या हमारी परिभाषाओं में है।

इतिहास बताता है कि भांग मानव सभ्यता के साथ हज़ारों वर्षों से जुड़ी रही है। यह अचानक आधुनिक समाज में पैदा हुआ कोई खतरनाक नशा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और चिकित्सीय परंपराओं का हिस्सा रहा है।

प्राचीन भारत में भांग को औषधि माना गया। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख पाचन सुधारने, दर्द कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए किया गया। वहीं धार्मिक संदर्भों में यह संयम और ध्यान से जुड़ी हुई रही।

लेकिन समय के साथ परिप्रेक्ष्य बदल गया। औपनिवेशिक शासन, आधुनिक कानून और “नशा” की नई परिभाषाओं ने भांग को एक खतरे के रूप में देखना शुरू किया।

यहीं से भ्रम पैदा हुआ।

भांग, गांजा और चरस—तीनों को एक ही श्रेणी में रख दिया गया, जबकि जैविक और प्रभाव के स्तर पर ये तीनों समान नहीं हैं।

भांग मुख्यतः पत्तियों से बनती है। इसका प्रभाव सीमित और नियंत्रित होता है, जबकि गांजा और चरस में सक्रिय तत्वों की मात्रा अधिक होती है। लेकिन कानून ने इन भेदों को लंबे समय तक अनदेखा किया।

इसका परिणाम यह हुआ कि समाज ने भांग को या तो पूरी तरह पवित्र माना, या पूरी तरह अपराध। बीच की वैज्ञानिक समझ कहीं खो गई।

आधुनिक विज्ञान ने जब भांग के रासायनिक घटकों का अध्ययन शुरू किया, तब पहली बार यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल नशा पैदा करने वाला पदार्थ नहीं है।

मानव शरीर में पहले से मौजूद जैविक प्रणालियाँ भांग के कुछ तत्वों पर प्रतिक्रिया करती हैं। यह संयोग नहीं, बल्कि विकास की कहानी का हिस्सा है।

यहीं से भांग को “दवा” के रूप में देखने की प्रक्रिया शुरू हुई—न कि विश्वास के आधार पर, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ।

लेकिन समाज अभी भी दो ध्रुवों में बँटा हुआ है।

एक ओर वह वर्ग है जो भांग को सामाजिक पतन का कारण मानता है। दूसरी ओर वह वर्ग है जो इसे चमत्कारी औषधि के रूप में प्रस्तुत करता है।

सच्चाई इन दोनों के बीच है।

भांग न तो पूर्णतः सुरक्षित है, न ही पूर्णतः खतरनाक। उसका प्रभाव मात्रा, उपयोग, व्यक्ति और उद्देश्य पर निर्भर करता है।


भांग को केवल नशे के चश्मे से देखना एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक भूल है। वास्तविकता यह है कि भांग उन गिनी-चुनी प्राकृतिक वनस्पतियों में से है, जिन पर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान गंभीरता से शोध कर रहा है।

भांग में पाए जाने वाले सक्रिय रासायनिक यौगिकों को कैनाबिनॉइड्स कहा जाता है। इनमें प्रमुख रूप से THC और CBD शामिल हैं। THC वह तत्व है जो नशे से जुड़ा है, जबकि CBD का मनोवैज्ञानिक प्रभाव नहीं होता और वही चिकित्सा उपयोगों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

आधुनिक अनुसंधान यह स्पष्ट करता है कि भांग सीधे दर्द को दबाती नहीं, बल्कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में दर्द की व्याख्या करने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। यही कारण है कि यह पुरानी पीड़ा, न्यूरोपैथिक पेन और कैंसर-संबंधी दर्द में सहायक पाई गई है।

मेडिकल साइंस में भांग का सबसे महत्वपूर्ण योगदान न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में सामने आया है। मिर्गी के कुछ दुर्लभ और गंभीर मामलों में, जहाँ पारंपरिक दवाएँ विफल हो जाती हैं, वहाँ CBD आधारित उपचारों ने आशाजनक परिणाम दिखाए हैं।

इसके अतिरिक्त, भांग का उपयोग मांसपेशियों के अनैच्छिक संकुचन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसंस जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों में भी अध्ययनाधीन है। यहाँ उद्देश्य नशा नहीं, बल्कि तंत्रिका संकेतों को संतुलित करना होता है।

मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में भांग एक जटिल विषय है। नियंत्रित और चिकित्सकीय खुराक में यह चिंता और PTSD जैसे विकारों में सहायक हो सकती है, लेकिन अनियंत्रित उपयोग इसके विपरीत प्रभाव भी उत्पन्न कर सकता है। यही अंतर दवा और नशे की रेखा खींचता है।

यही कारण है कि चिकित्सा विज्ञान भांग को “उपचार योग्य पदार्थ” के रूप में देखता है, न कि सामाजिक आदत के रूप में। प्रयोगशाला में नियंत्रित मात्रा, शुद्ध अर्क और चिकित्सकीय निगरानी—ये सभी इसके वैज्ञानिक उपयोग की अनिवार्य शर्तें हैं।

आधुनिक चिकित्सा यह स्वीकार करती है कि भांग न तो पूर्ण समाधान है और न ही पूर्ण समस्या। वह एक औजार है, जिसका मूल्य उसके उपयोग के तरीके से तय होता है।


भांग को लेकर समाज का सबसे बड़ा संघर्ष इसका वैज्ञानिक स्वरूप नहीं, बल्कि इसका सामाजिक और कानूनी अर्थ है। यही कारण है कि भांग आज भी दवा और नशे के बीच फँसी हुई है।

भारत जैसे देशों में भांग का ऐतिहासिक उपयोग धार्मिक और आयुर्वेदिक परंपराओं से जुड़ा रहा है। इसके बावजूद आधुनिक कानून इसे संदेह की दृष्टि से देखते हैं, क्योंकि अनियंत्रित उपयोग ने सामाजिक समस्याएँ भी पैदा की हैं।

कानून भांग के पौधे और उससे निकले उत्पादों के बीच स्पष्ट अंतर नहीं कर पाता। यही भ्रम चिकित्सा शोध और जनस्वास्थ्य नीति के बीच टकराव पैदा करता है।

जहाँ एक ओर वैज्ञानिक समुदाय नियंत्रित कैनाबिनॉइड्स को संभावित औषधि मानता है, वहीं दूसरी ओर समाज इसका दुरुपयोग देखकर इसे पूरी तरह खारिज करने की माँग करता है।

यह टकराव इस तथ्य को उजागर करता है कि किसी भी शक्तिशाली पदार्थ का मूल्य उसके नियंत्रण में होता है, न कि उसके अस्तित्व में।

भविष्य में भांग का स्थान दवा के रूप में तभी सुरक्षित होगा, जब स्पष्ट नियम, चिकित्सकीय निगरानी और सार्वजनिक जागरूकता साथ-साथ आगे बढ़ें।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश भांग-आधारित दवाओं को सीमित रूप में स्वीकार कर चुके हैं। यह संकेत है कि विज्ञान धीरे-धीरे नीति को दिशा दे रहा है, न कि भावनात्मक प्रतिक्रिया।

नैतिक दृष्टि से भी प्रश्न सरल नहीं है। क्या किसी पदार्थ को इसलिए अस्वीकार किया जाए क्योंकि उसका दुरुपयोग संभव है? या उसे नियंत्रित कर लाभ उठाया जाए?

इतिहास बताता है कि समाज ने हर नई चिकित्सा खोज के साथ यही संघर्ष किया है—चाहे वह एनेस्थीसिया हो, मॉर्फिन हो या आधुनिक मानसिक स्वास्थ्य दवाएँ।

भांग भी उसी संक्रमण काल से गुजर रही है, जहाँ ज्ञान और डर आमने-सामने खड़े हैं।

इस अंतिम भाग में स्पष्ट होता है कि भांग न तो पूर्ण नशा है, न पूर्ण औषधि। वह एक जैव-रासायनिक संभावना है, जिसे मानव विवेक दिशा दे सकता है।

अंततः प्रश्न भांग का नहीं, बल्कि हमारे निर्णय लेने के तरीके का है।

जहाँ विज्ञान मार्गदर्शन देता है, वहाँ समाज को संतुलन सीखना होता है।

और यही संतुलन तय करेगा कि भांग भविष्य में दवा बनेगी या विवाद।


नवीनतम पोस्ट



😂 FreshHindiQuotes – Hindi Jokes | मजेदार चुनिन्दा चुटकुले

FreshHindiQuotes में आपका स्वागत है — जहाँ आपको मिलेंगे Best Hindi Jokes, मजेदार Emoji के साथ और आकर्षक Bitmoji स्टाइल प्रेज़ेंटेशन में।

यहाँ हम सोशल मीडिया से चुन-चुन कर लाते हैं सबसे मस्त, वायरल और चुनिन्दा हिंदी चुटकुले, जिन्हें हमारे Forum और Group Members curate करते हैं — ताकि हर पाठक को मिले शुद्ध मनोरंजन और हँसी की पूरी खुराक।

हमारे About Section में एक एक्साइटेड Bitmoji कैरेक्टर torn paper से बाहर आता हुआ दिखाया गया है — जो इस प्लेटफॉर्म की एनर्जी, खुशी और हँसी के मूड को दर्शाता है।

📌 FreshHindiQuotes पर आपको मिलेगा:

  • ✅ Funny Hindi Jokes with Emoji
  • ✅ Desi Chutkule & Viral Comedy Content
  • ✅ Multiple Joke Categories (Family, Office, Sardar, Husband-Wife, Kids & More)
  • ✅ Daily Updated मजेदार कंटेंट

यह वो जगह है जहाँ Hindi lovers पढ़ते हैं, लिखते हैं और शेयर करते हैं जोक्स। आप भी अपने पसंदीदा चुटकुले पोस्ट कर सकते हैं और दूसरों की हँसी की वजह बन सकते हैं।

😄 चुनिन्दा चुटकुले — पढ़ो और पढ़ाओ, सुनो और सुनाओ!

FreshHindiQuotes सिर्फ एक वेबसाइट नहीं —
यह है एक Ha…Ha…! Movement, जहाँ हर विज़िटर बनता है हमारी हँसी की चेन का हिस्सा।

आज ही जुड़िए, पढ़िए मजेदार Hindi Jokes, शेयर कीजिए अपने दोस्तों के साथ — और फैलाइए मुस्कान पूरे इंटरनेट पर!

FreshHindiQuotes – क्योंकि हँसी ज़रूरी है।

👉 नीचे लिंक खोलें (New Tab में): हिंदी - जोक्स

मोबाइल की कहानी

मोबाइल फोन केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के संचार, सोच और व्यवहार में आया सबसे बड़ा परिवर्तन है। इसकी कहानी सुविधा, शक्ति और निर्भरता—तीनों की कहानी है।

कीबोर्ड से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

कीबोर्ड (Keyboard) कंप्यूटर इनपुट डिवाइस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसका उपयोग टेक्स्ट, संदेश, डेटा और आपके कंप्यूटर पर विभिन्न कार्रवाईयों को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। कीबोर्ड के माध्यम से आप अक्षर, संख्याएँ, विशेष चरित्र, और कमांड्स कंप्यूटर को भेज सकते हैं।कंप्यूटर पर काम करते समय हमें अक्सर कुछ लिखना होता...

एटाकामा: धरती का सबसे सूखा स्थान

एटाकामा रेगिस्तान धरती का सबसे सूखा स्थान क्यों है? जानिए यहां वर्षों तक बारिश न होने का वैज्ञानिक कारण, अद्भुत जीवन, NASA के प्रयोग और वह रहस्य जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया।

परमाणु की खोज कैसे हुई जब वह दिखता भी नहीं?

परमाणु की खोज यह दिखाती है कि विज्ञान केवल दिखाई देने वाली चीज़ों पर निर्भर नहीं करता। जब किसी अदृश्य तत्व के प्रभाव बार-बार, मापनीय और नियमबद्ध हों, तो विज्ञान उसे वास्तविक सत्य मान लेता है।

आधार कार्ड से जुड़े 10 नियम जो ज़्यादातर लोगों को नहीं पता

आधार कार्ड से जुड़े ऐसे 10 कानूनी और व्यावहारिक नियम जिन्हें ज़्यादातर लोग नहीं जानते। यह लेख बताएगा कि कब आधार देना ज़रूरी नहीं, आपके अधिकार क्या हैं और कहाँ सावधानी ज़रूरी है।

रामायण में असली परीक्षा युद्ध नहीं थी, बल्कि चरित्र था

रामायण में संघर्ष का केंद्र युद्ध नहीं, बल्कि मर्यादा, संयम और निर्णय थे। यह कथा दिखाती है कि सच्ची विजय बाहरी शत्रु पर नहीं, बल्कि अपने चरित्र और आचरण पर होती है।

ताँबा: पहली धातु जिसने सभ्यता को आकार दिया

ताँबा मानव इतिहास की पहली धातु थी जिसने पत्थर युग को पीछे छोड़ा। इसी धातु ने औज़ार, व्यापार और स्थायी सभ्यता की नींव रखी, जहाँ से मानव प्रगति ने असली रूप लिया।

रेगिस्तान रात में इतना ठंडा क्यों हो जाता है?

रेगिस्तान दिन में तपता और रात में जमाने वाली ठंड क्यों बन जाता है? जानिए तापमान गिरने के पीछे का विज्ञान, रेत की भूमिका, नमी की कमी और पृथ्वी की ऊष्मा प्रणाली का पूरा सच।

युद्ध हारने के बाद राजाओं और राज्यों का क्या होता था?

प्राचीन भारत में युद्ध केवल शक्ति की परीक्षा नहीं था। पराजय के बाद राजाओं, प्रजा और राज्यों का भविष्य धर्म, समझौते और राजनीतिक संतुलन से तय होता था—न कि केवल विनाश से।

क्या ब्रह्मांड का कोई अंत है?

क्या ब्रह्मांड कहीं खत्म होता है या यह अनंत है? यह लेख आधुनिक खगोल विज्ञान, बिग बैंग सिद्धांत और वैज्ञानिक मॉडलों के आधार पर ब्रह्मांड के अंत की गहराई से पड़ताल करता है।

बर्मूडा के नीचे चौंकाने वाली खोज

बर्मूडा ट्रायंगल के नीचे हालिया वैज्ञानिक खोजों ने रहस्य को नई दिशा दी है। जानिए समुद्र की गहराइयों में मिले संकेत, भूवैज्ञानिक सच, मीथेन हाइड्रेट और वह विज्ञान जो मिथकों से परे है।

थर्मस गर्म या ठंडा कैसे बनाए रखता है?

थर्मस साधारण बोतल नहीं है। यह ऊष्मा के तीनों मार्ग—चालन, संवहन और विकिरण—को लगभग पूरी तरह रोक देता है, जिससे अंदर रखा द्रव लंबे समय तक गर्म या ठंडा बना रहता है।

बिहार – सामान्य ज्ञान – भाग दो

सारण जिले में गंगा नदी के उत्तरी किनारे पर चिरांद, नवपाषाण युग (लगभग ४५००-२३४५ ईसा पूर्व) और ताम्र युग ( २३४५-१७२६ ईसा पूर्व) से...

📱 AI फोन: भविष्य की कहानी, जो अभी शुरू हो चुकी है

AI फोन स्मार्टफोन से आगे बढ़कर सोचने वाला साथी बन रहा है। यह सुविधा, गोपनीयता और निर्णयों को बदल रहा है—लेकिन साथ ही निर्भरता का प्रश्न भी उठाता है। भविष्य जेब में शुरू चुका है।

आत्मा को अमर क्यों माना गया?

आत्मा को अमर मानने की अवधारणा केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि चेतना, कर्म और अस्तित्व की निरंतरता पर आधारित दार्शनिक निष्कर्ष है, जो मृत्यु को अंत नहीं बल्कि परिवर्तन मानता है।

सूरज हर सेकंड इतनी ऊर्जा कैसे पैदा करता है?

सूरज हर सेकंड अपार ऊर्जा इसलिए पैदा करता है क्योंकि उसके केंद्र में नाभिकीय संलयन होता है, जहां हाइड्रोजन परमाणु मिलकर हीलियम बनाते हैं और द्रव्यमान ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।

सोना बनाने का सपना: अल्केमी, भ्रम और वैज्ञानिक हकीकत

सोना बनाने का सपना सदियों तक मानव कल्पना, लालच और प्रयोगों का केंद्र रहा। अल्केमी ने उम्मीद जगाई, लेकिन आधुनिक विज्ञान ने स्पष्ट किया कि सच और भ्रम के बीच रेखा कहाँ खिंचती है।

मेडिटेशन से बुरी आदतें छोड़ना क्यों आसान हो जाता है?

मेडिटेशन बुरी आदतों को सीधे नहीं रोकता, बल्कि उनके पीछे काम करने वाले अवचेतन पैटर्न को स्पष्ट करता है। जब जागरूकता बढ़ती है, तो आदतें स्वतः कमजोर पड़ने लगती हैं।

शून्य की खोज कैसे हुई

शून्य केवल एक अंक नहीं, बल्कि मानव इतिहास की सबसे क्रांतिकारी खोज है। जानिए भारत में शून्य की उत्पत्ति, आर्यभट्ट-ब्रह्मगुप्त का योगदान और कैसे इसने गणित, विज्ञान व तकनीक की दिशा बदल दी।

भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता आज भी रहस्य क्यों है?

भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता आज भी रहस्य है क्योंकि उसकी लिपि अभी तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी, अचानक पतन के ठोस प्रमाण नहीं मिले और सीमित पुरातात्विक साक्ष्य कई प्रश्न अनुत्तरित छोड़ते हैं।


error: Content is protected !!