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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

मानव शरीर बिना भोजन के कितने दिन जीवित रह सकता है?

शरीर भोजन के बिना कैसे काम करता है?

मानव शरीर ऊर्जा के बिना जीवित नहीं रह सकता।

सामान्य स्थिति में ऊर्जा भोजन से प्राप्त ग्लूकोज़ से आती है।

लेकिन जब भोजन बंद हो जाता है, तो शरीर वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग शुरू करता है।

पहले २४ घंटे: ग्लाइकोजन का उपयोग

भोजन बंद होने के बाद पहले ६ से २४ घंटों तक शरीर यकृत में संग्रहित ग्लाइकोजन का उपयोग करता है।

ग्लाइकोजन ग्लूकोज़ का संग्रहित रूप है।

यह रक्त में शर्करा का स्तर बनाए रखने में मदद करता है।

लगभग २४ घंटे में यह भंडार समाप्त हो सकता है।

दूसरा चरण: वसा का उपयोग

ग्लाइकोजन समाप्त होने के बाद शरीर वसा को तोड़ना शुरू करता है।

इस प्रक्रिया को लिपोलिसिस कहा जाता है।

वसा से केटोन नामक ऊर्जा अणु बनते हैं।

मस्तिष्क भी कुछ समय बाद केटोन को ऊर्जा के रूप में उपयोग करने लगता है।

केटोसिस की अवस्था

२ से ३ दिनों के उपवास के बाद शरीर केटोसिस में प्रवेश कर सकता है।

यह अवस्था दर्शाती है कि शरीर वसा को मुख्य ऊर्जा स्रोत बना चुका है।

यह जीवित रहने की प्राकृतिक अनुकूलन प्रक्रिया है।

लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है।

यदि भोजन लंबे समय तक न मिले, तो शरीर मांसपेशियों को भी तोड़ना शुरू कर देता है।


वैज्ञानिक अनुमान क्या कहते हैं?

चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार मानव शरीर बिना भोजन के औसतन १ से २ महीने तक जीवित रह सकता है।

लेकिन यह अनुमान कई कारकों पर निर्भर करता है।

उम्र, शरीर में वसा की मात्रा, जल उपलब्धता और स्वास्थ्य स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण शर्त है — पानी उपलब्ध होना।

यदि पानी भी न मिले तो?

मानव शरीर बिना पानी के सामान्यतः ३ से ५ दिन से अधिक जीवित नहीं रह सकता।

डिहाइड्रेशन अंगों की विफलता का प्रमुख कारण बनता है।

इसलिए “भोजन बनाम पानी” तुलना में पानी अधिक आवश्यक है।

वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार मृत्यु का प्राथमिक कारण अक्सर निर्जलीकरण होता है, न कि भूख।

तीसरा चरण: मांसपेशी और अंग क्षति

२ से ३ सप्ताह के बाद शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है।

प्रोटीन विघटन से आवश्यक एंजाइम और प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है।

लंबे उपवास में हृदय की मांसपेशी भी कमजोर हो सकती है।

इसी कारण अत्यधिक भूख की स्थिति जानलेवा हो सकती है।

ऐतिहासिक उदाहरण

इतिहास में कुछ दस्तावेजित उपवास ४० से ७० दिनों तक चले हैं।

लेकिन ये चिकित्सकीय निगरानी में और पानी की उपलब्धता के साथ हुए।

१९८१ में आयरलैंड के राजनीतिक उपवास के दौरान कई व्यक्तियों की मृत्यु लगभग ४६ से ७३ दिनों के बीच हुई।

यह दर्शाता है कि सीमा व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करती है।

शरीर कब विफल होने लगता है?

लगातार ऊर्जा की कमी से रक्तचाप गिर सकता है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हृदय की धड़कन को प्रभावित कर सकता है।

अंततः अंग विफलता मृत्यु का कारण बन सकती है।

इसलिए लंबे समय तक भोजन से वंचित रहना अत्यंत जोखिमपूर्ण है।


स्टार्वेशन सिंड्रोम क्या है?

जब शरीर लंबे समय तक ऊर्जा और पोषक तत्वों से वंचित रहता है, तो उसे स्टार्वेशन सिंड्रोम कहा जाता है।

इस अवस्था में शरीर अपनी संरचना को बनाए रखने में असमर्थ होने लगता है।

मांसपेशियाँ, प्रतिरक्षा प्रणाली और आंतरिक अंग धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार लंबे उपवास के बाद शरीर का चयापचय दर भी कम हो जाता है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और हृदय जोखिम

भोजन की कमी से सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट घट सकते हैं।

इनका असंतुलन हृदय की लय को प्रभावित कर सकता है।

गंभीर मामलों में अनियमित धड़कन या हृदय रुकने का खतरा होता है।

यही कारण है कि अत्यधिक उपवास को चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा

लंबे उपवास के बाद अचानक भोजन शुरू करना भी खतरनाक हो सकता है।

इसे रीफीडिंग सिंड्रोम कहा जाता है।

इसमें इलेक्ट्रोलाइट तेजी से कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं और रक्त में स्तर गिर जाता है।

१९४० के दशक में युद्धबंदी शिविरों के अध्ययन में यह प्रभाव दर्ज किया गया था।

इसलिए लंबे उपवास के बाद पोषण धीरे-धीरे और नियंत्रित मात्रा में दिया जाता है।

मृत्यु का वास्तविक कारण क्या होता है?

भूख से सीधे मृत्यु कम होती है।

अक्सर अंग विफलता, संक्रमण या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन प्रमुख कारण होते हैं।

कुपोषण से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है।

संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।

अंततः बहु-अंग विफलता जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

अंतिम निष्कर्ष

मानव शरीर अनुकूलन में सक्षम है।

वह कुछ समय तक भोजन के बिना जीवित रह सकता है।

लेकिन यह क्षमता सीमित है और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

जल की उपलब्धता, स्वास्थ्य स्थिति और शरीर की संरचना परिणाम तय करते हैं।

लंबे समय तक भोजन से वंचित रहना गंभीर चिकित्सीय जोखिम उत्पन्न करता है।

इसलिए उपवास या भोजन त्याग हमेशा चिकित्सकीय सलाह के साथ ही करना चाहिए।


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