
क्या हर जीव को पौधा या जानवर कहना ज़रूरी है?
धरती पर जीवन को हम दो हिस्सों में बाँटते आए हैं—
पौधे और जानवर।
लेकिन प्रकृति इस नियम को हमेशा नहीं मानती।
एक ऐसा जीव जिसने विज्ञान को उलझा दिया
वैज्ञानिक अध्ययनों में एक ऐसा जीव पाया गया—
जो न पूरी तरह पौधा है,
और न ही पूरा जानवर।
यह जीव सूरज की रोशनी से ऊर्जा भी बनाता है,
और ज़रूरत पड़ने पर दूसरे जीवों को खाकर जीवित भी रहता है।
यह खोज क्यों चौंकाने वाली है?
जीवविज्ञान के अनुसार पौधे और जानवरों की परिभाषाएँ साफ़ थीं।
लेकिन यह जीव इन दोनों के बीच खड़ा दिखाई देता है।
यही कारण है कि वैज्ञानिकों को नई श्रेणियाँ बनानी पड़ीं।
क्या यह जीवन की शुरुआत की झलक है?
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार ऐसे जीव जीवन के शुरुआती चरणों की झलक दे सकते हैं।
जब पौधे और जानवर अभी अलग-अलग नहीं हुए थे।
इस पहले भाग में हमने उस रहस्य को छुआ है—
जो जीवन की सीधी रेखा को प्रश्नों में बदल देता है।
अगले भाग में हम जानेंगे—
यह जीव वास्तव में काम कैसे करता है,
और विज्ञान इसे क्या नाम देता है।

यह जीव वास्तव में है क्या?
यह कोई कल्पना नहीं,
बल्कि एक सूक्ष्मजीव है जिसे वैज्ञानिक मिक्सोट्रॉफ कहते हैं।
मिक्सोट्रॉफ का अर्थ—
ऐसा जीव जो एक से अधिक जीवन-रणनीति अपनाता है।
पौधे जैसी क्षमता
इस जीव के भीतर क्लोरोप्लास्ट पाए जाते हैं।
यही क्लोरोप्लास्ट सूरज की रोशनी से ऊर्जा बनाते हैं।
यह प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण कहलाती है—
जो सामान्यतः केवल पौधों में होती है।
जानवर जैसी चालाकी
लेकिन जब रोशनी कम हो,
तो यही जीव दूसरे सूक्ष्म जीवों को खाने लगता है।
यह व्यवहार जानवरों जैसा है—
जहाँ ऊर्जा सीधे भोजन से मिलती है।
विज्ञान को नई श्रेणी क्यों बनानी पड़ी?
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार ऐसे जीव पुरानी वर्गीकरण प्रणाली में फिट नहीं होते।
इसीलिए जीवविज्ञान में प्रोटिस्टा जैसे नए समूह बनाए गए।
ये समूह हमें बताते हैं—
जीवन सीधी रेखा में नहीं,
बल्कि शाखाओं में विकसित हुआ है।
यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?
जलवायु अध्ययनों में पाया गया कि ऐसे जीव पारिस्थितिकी संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ये न केवल ऑक्सीजन चक्र,
बल्कि खाद्य श्रृंखला को भी स्थिर रखते हैं।
इस दूसरे भाग में हमने समझा—
यह जीव कैसे दो दुनियाओं के बीच सेतु बनता है।
अंतिम भाग में हम जानेंगे—
क्या ऐसे जीव मानव भविष्य और जीवन की परिभाषा को बदल सकते हैं।

यह जीव हमें क्या सिखाता है?
यह जीव केवल एक वैज्ञानिक जिज्ञासा नहीं है।
यह हमें याद दिलाता है—
प्रकृति हमारी बनाई हुई श्रेणियों में काम नहीं करती।
जीवन कभी “या तो–या” नहीं होता,
बल्कि अक्सर “दोनों” होता है।
क्या जीवन की परिभाषा अधूरी है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे जीव जीवन की परिभाषा को फिर से सोचने पर मजबूर करते हैं।
पौधा और जानवर—
ये वर्ग हमारे लिए सुविधाजनक हैं,
लेकिन प्रकृति के लिए नहीं।
जीवन एक निरंतर प्रवाह है,
जहाँ सीमाएँ धुंधली होती जाती हैं।
भविष्य के विज्ञान में इसकी भूमिका
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया कि ऐसे मिक्सोट्रॉफ जीव जलवायु परिवर्तन को समझने में महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।
ये जीव तेज़ी से बदलते वातावरण में खुद को ढाल सकते हैं।
इसी क्षमता के कारण वैज्ञानिक इन्हें—
भविष्य के बायो-इंडिकेटर मानते हैं।
क्या यही भविष्य का जीवन है?
अंतरिक्ष अनुसंधान में भी ऐसे जीवों का अध्ययन तेज़ी से बढ़ रहा है।
क्योंकि यदि पृथ्वी के बाहर जीवन मिला, तो वह शायद न पूरा पौधा होगा, न पूरा जानवर।
बल्कि कुछ ऐसा—
जो इन दोनों के बीच खड़ा होगा।
निष्कर्ष
यह जीव हमें डराता नहीं, हमें सिखाता है।
कि जीवन हमारी सोच से कहीं ज़्यादा जटिल, कहीं ज़्यादा सुंदर, और कहीं ज़्यादा अनोखा है।
शायद यही कारण है—
कि विज्ञान आज भी हैरान है।

