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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

मेसोपोटामिया: ईरान की भूली-बिसरी सभ्यता

सभ्यता की शुरुआत, जिसे भुला दिया गया

जब भी दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं की बात होती है, तो मिस्र, सिंधु घाटी और चीन का नाम तुरंत लिया जाता है। लेकिन इन सबसे भी पहले एक ऐसी सभ्यता थी, जिसने इंसान को लिखना सिखाया, कानून दिए, शहर बसाए और समय को मापा। इस सभ्यता का नाम था—मेसोपोटामिया

विडंबना यह है कि आज मेसोपोटामिया को अक्सर केवल “इराक की सभ्यता” कहा जाता है, जबकि इसका एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा आधुनिक ईरान में फैला हुआ था। यही कारण है कि इसे ईरान की भूली-बिसरी सभ्यता भी कहा जाता है।

यह लेख उसी भूले हुए इतिहास को सामने लाने का प्रयास है—तथ्यों, विज्ञान और प्रमाणों के साथ।

मेसोपोटामिया का अर्थ और भौगोलिक सच्चाई

“मेसोपोटामिया” ग्रीक शब्द है, जिसका अर्थ होता है—दो नदियों के बीच की भूमि। ये दो नदियाँ थीं—टिगरिस (Tigris) और यूफ्रेटिस (Euphrates)।

इन नदियों का उद्गम आधुनिक तुर्की से होता है और ये सीरिया, इराक तथा पश्चिमी ईरान से होकर बहती हैं। यही क्षेत्र हजारों वर्षों तक मानव सभ्यता का केंद्र बना रहा।

ईरान का पश्चिमी भाग—विशेषकर एलाम (Elam) क्षेत्र—मेसोपोटामियन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा था, लेकिन राजनीतिक कारणों से इसे इतिहास में अलग कर दिया गया।


सुमेरियन: दुनिया की पहली ज्ञात सभ्यता

लगभग 3500 ईसा पूर्व, सुमेरियन लोगों ने दुनिया के पहले शहर बसाए—उर, उरुक और लागाश। यहीं से संगठित मानव समाज की शुरुआत हुई।

सुमेरियन लोगों ने पहली बार कृषि को व्यवस्थित किया, सिंचाई प्रणाली विकसित की और स्थायी नगर बनाए।

यही वह सभ्यता थी जिसने मानव इतिहास को शिकारी जीवन से निकालकर शहरी जीवन की ओर मोड़ा।

लेखन की खोज: क्यूनिफॉर्म लिपि

सुमेरियन सभ्यता की सबसे बड़ी देन थी—लेखन। क्यूनिफॉर्म लिपि (Cuneiform) को दुनिया की पहली लिखित भाषा माना जाता है।

शुरुआत में इसका उपयोग व्यापार और अनाज के हिसाब-किताब के लिए हुआ, लेकिन बाद में यह इतिहास, कानून और साहित्य का माध्यम बनी।

यह वही लेखन प्रणाली है, जिसके बिना आज का इतिहास अधूरा होता।


एलाम: ईरान की अनदेखी मेसोपोटामियन शक्ति

एलाम सभ्यता, जो आधुनिक ईरान के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित थी, मेसोपोटामिया की समकालीन और शक्तिशाली संस्कृति थी।

एलामियों की अपनी भाषा, प्रशासन और सैन्य शक्ति थी। वे सुमेर और अक्काद दोनों से बराबरी की टक्कर लेते थे।

लेकिन पश्चिमी इतिहास लेखन में एलाम को अक्सर हाशिये पर रखा गया—यही कारण है कि ईरान का योगदान दब गया।

कानून, विज्ञान और समय की खोज

मेसोपोटामिया ने दुनिया को पहला लिखित कानून दिया—हम्मुराबी का संहिता। यह कानून “आँख के बदले आँख” के सिद्धांत पर आधारित था।

यहीं से गणित में 60-आधारित प्रणाली आई—जिसका उपयोग आज भी समय (60 सेकंड, 60 मिनट) और कोणों में होता है।

खगोल विज्ञान, कैलेंडर और ज्योतिष—इन सबकी जड़ें भी मेसोपोटामिया में मिलती हैं।


मेसोपोटामिया का पतन: सभ्यता क्यों खो गई?

लगातार युद्ध, नदियों का मार्ग बदलना, पर्यावरणीय क्षरण और बाहरी आक्रमण—इन सभी ने मिलकर इस महान सभ्यता को कमजोर कर दिया।

फारसी, यूनानी और बाद में इस्लामी साम्राज्यों के उदय के साथ मेसोपोटामियन पहचान धीरे-धीरे मिटा दी गई।

इतिहास जीवित रहा, लेकिन नाम बदल दिए गए।

मिथक बनाम ऐतिहासिक सच्चाई

मिथक: मेसोपोटामिया केवल इराक तक सीमित थी। वास्तविकता: इसका गहरा और निर्णायक हिस्सा ईरान में था।

मिथक: ईरान की सभ्यता फारस से शुरू होती है। वास्तविकता: ईरान की जड़ें मेसोपोटामिया और एलाम में हैं।

निष्कर्ष: इतिहास जिसे फिर से याद किया जाना चाहिए

मेसोपोटामिया केवल एक प्राचीन सभ्यता नहीं थी, बल्कि आधुनिक दुनिया की नींव थी। ईरान का इसमें योगदान उतना ही महत्वपूर्ण था, जितना सुमेर और अक्काद का।

इस भूली-बिसरी सभ्यता को समझना हमें यह सिखाता है कि इतिहास केवल विजेताओं की कहानी नहीं, बल्कि दबे हुए सच की खोज भी है।

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