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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

क्यों समुद्र का पानी खारा होता है?

समुद्र खारा क्यों है?

समुद्र का पानी स्वाभाविक रूप से नमकीन है।

इसका मुख्य कारण घुले हुए खनिज हैं।

विशेष रूप से सोडियम और क्लोराइड आयन समुद्री जल में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

इन्हीं दोनों के संयोजन से साधारण नमक बनता है।

खनिज समुद्र तक कैसे पहुँचते हैं?

वर्षा का पानी जब धरती पर गिरता है, तो वह चट्टानों से संपर्क करता है।

चट्टानों में मौजूद खनिज धीरे-धीरे घुल जाते हैं।

नदियाँ इन घुले खनिजों को अपने साथ समुद्र तक ले जाती हैं।

यह प्रक्रिया लाखों वर्षों से चल रही है।

लाखों वर्षों का संचय

नदियाँ लगातार खनिज लाती रहती हैं।

समुद्र से पानी वाष्पित हो जाता है, लेकिन नमक वहीं रह जाता है।

इस कारण नमक की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ती गई।

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार समुद्री जल की औसत लवणता लगभग ३.५ प्रतिशत है।

क्या केवल नदियाँ जिम्मेदार हैं?

नदियाँ मुख्य स्रोत हैं, लेकिन वे अकेली वजह नहीं हैं।

समुद्र के नीचे ज्वालामुखीय गतिविधि भी खनिज छोड़ती है।

हाइड्रोथर्मल वेंट्स समुद्री जल में आयन मिलाते हैं।

यह पूरी प्रक्रिया भूवैज्ञानिक समय पैमाने पर चलती है।


यदि नमक बढ़ता रहता है, तो सीमा क्यों है?

पहली नज़र में लगता है कि नदियाँ लगातार नमक लाती हैं।

तो समुद्र अत्यधिक खारा हो जाना चाहिए।

लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं होता।

समुद्र की लवणता अपेक्षाकृत स्थिर रहती है।

आयन चक्र और रासायनिक संतुलन

समुद्री जल में आयन केवल जमा नहीं होते।

वे विभिन्न रासायनिक चक्रों में भाग लेते हैं।

कुछ आयन समुद्री जीवों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।

उदाहरण के लिए कैल्शियम और कार्बोनेट शंख और प्रवाल बनाने में उपयोग होते हैं।

यह प्रक्रिया समुद्र से कुछ खनिज निकालती रहती है।

समुद्री तल पर अवसादन

कुछ घुले खनिज समुद्री तल पर जम जाते हैं।

लाखों वर्षों में मोटी तलछटी परतें बनती हैं।

यह भूवैज्ञानिक प्रक्रिया अतिरिक्त आयनों को स्थायी रूप से बंद कर देती है।

इससे लवणता अनियंत्रित रूप से नहीं बढ़ती।

हाइड्रोथर्मल वेंट्स की दोहरी भूमिका

समुद्री तल के ज्वालामुखीय छिद्र खनिज जोड़ते भी हैं और हटाते भी हैं।

जब समुद्री जल अत्यधिक गर्म चट्टानों से गुजरता है, तो रासायनिक प्रतिक्रिया होती है।

कुछ आयन जल से हट जाते हैं और चट्टानों में बंद हो जाते हैं।

यह भी संतुलन बनाए रखने में सहायक है।

औसत लवणता लगभग स्थिर क्यों?

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार समुद्री जल की औसत लवणता लगभग ३५ ग्राम प्रति लीटर है।

यह प्रतिशत भूवैज्ञानिक समय पैमाने पर अपेक्षाकृत स्थिर रहा है।

इसका कारण इनपुट और आउटपुट प्रक्रियाओं का संतुलन है।

पृथ्वी एक गतिशील लेकिन संतुलित प्रणाली है।


क्या सभी महासागर समान रूप से खारे हैं?

सामान्यतः विश्व के खुले महासागरों की औसत लवणता लगभग ३.५ प्रतिशत होती है।

लेकिन यह हर स्थान पर समान नहीं रहती।

तापमान, वर्षा, वाष्पीकरण और नदी प्रवाह के आधार पर इसमें अंतर आता है।

उष्ण और शुष्क क्षेत्रों में वाष्पीकरण अधिक होने से लवणता बढ़ सकती है।

जहाँ पानी अधिक, वहाँ नमक कम

जहाँ भारी वर्षा होती है, वहाँ समुद्री जल अपेक्षाकृत कम खारा होता है।

बड़े नदी डेल्टा क्षेत्रों में भी लवणता कम हो सकती है।

उदाहरण के लिए अमेज़न नदी का मुहाना आसपास के समुद्री जल को पतला कर देता है।

यह दर्शाता है कि जल चक्र लवणता को प्रभावित करता है।

मृत सागर इतना खारा क्यों?

मृत सागर पृथ्वी के सबसे खारे जल निकायों में से एक है।

इसकी लवणता लगभग ३० प्रतिशत से अधिक है।

यह महासागर नहीं, बल्कि एक बंद झील है।

इसमें आने वाला पानी बाहर नहीं निकलता।

केवल वाष्पीकरण होता है, जिससे नमक लगातार जमा होता रहता है।

घनत्व और तैरने की क्षमता

उच्च लवणता के कारण मृत सागर का जल अत्यधिक घना होता है।

इसमें व्यक्ति आसानी से तैर सकता है।

घनत्व बढ़ने से जल की उछाल शक्ति बढ़ जाती है।

यह एक भौतिक विज्ञान का सीधा उदाहरण है।

अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष

समुद्र का पानी लाखों वर्षों की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का परिणाम है।

नदियाँ खनिज लाती हैं और वाष्पीकरण जल को हटाता है।

रासायनिक चक्र और अवसादन संतुलन बनाए रखते हैं।

इसलिए समुद्री जल खारा है, लेकिन अनियंत्रित रूप से नहीं।

पृथ्वी की यह प्रणाली संतुलन और परिवर्तन दोनों का अद्भुत उदाहरण है।


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