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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

डर लगने पर शरीर में कंपकंपी क्यों होती है?

डर कहाँ से शुरू होता है?

डर केवल एक भावना नहीं है।

यह मस्तिष्क की एक तीव्र जैविक प्रतिक्रिया है।

इस प्रक्रिया का केंद्र अमिग्डाला नामक संरचना है।

अमिग्डाला खतरे की पहचान करने में विशेषज्ञ होती है।

अमिग्डाला की भूमिका

जब कोई संभावित खतरा दिखाई देता है, तो अमिग्डाला तुरंत सक्रिय हो जाती है।

यह हाइपोथैलेमस को संकेत भेजती है।

हाइपोथैलेमस शरीर के स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है।

यहीं से ‘फाइट या फ्लाइट’ प्रतिक्रिया शुरू होती है।

सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की सक्रियता

सहानुभूति तंत्रिका तंत्र सक्रिय होते ही अधिवृक्क ग्रंथियाँ एड्रेनालिन छोड़ती हैं।

एड्रेनालिन हृदयगति बढ़ाता है।

रक्त मांसपेशियों की ओर अधिक प्रवाहित होता है।

शरीर तुरंत क्रिया के लिए तैयार हो जाता है।

कंपकंपी क्यों शुरू होती है?

एड्रेनालिन के प्रभाव से मांसपेशियाँ अचानक तनावग्रस्त हो जाती हैं।

ऊर्जा का तीव्र संचार सूक्ष्म मांसपेशीय कंपन उत्पन्न कर सकता है।

इसी को हम कंपकंपी के रूप में महसूस करते हैं।

यह शरीर की सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है।


एड्रेनालिन का तत्काल प्रभाव

जब अमिग्डाला खतरे का संकेत देती है, तो अधिवृक्क ग्रंथियाँ एड्रेनालिन छोड़ती हैं।

यह प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में होती है।

एड्रेनालिन हृदयगति बढ़ाता है और रक्तचाप को ऊपर ले जाता है।

रक्त प्रवाह मांसपेशियों की ओर पुनर्निर्देशित हो जाता है।

कॉर्टिसोल और दीर्घकालिक प्रतिक्रिया

यदि भय की स्थिति बनी रहती है, तो हाइपोथैलेमस-पिट्यूटरी-अधिवृक्क अक्ष सक्रिय होता है।

इससे कॉर्टिसोल नामक हार्मोन स्रावित होता है।

कॉर्टिसोल शरीर को ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद करता है।

यह ग्लूकोज़ स्तर बढ़ाता है और शरीर को सतर्क अवस्था में रखता है।

मांसपेशियों में कंपन कैसे उत्पन्न होता है?

एड्रेनालिन मांसपेशीय तंतुओं को तेजी से सक्रिय करता है।

न्यूरॉन्स से आने वाले संकेत तीव्र और बार-बार होते हैं।

इससे सूक्ष्म अनैच्छिक संकुचन उत्पन्न होते हैं।

यही सूक्ष्म संकुचन कंपन या थरथराहट के रूप में महसूस होते हैं।

ऊर्जा अधिभार की स्थिति

डर की स्थिति में शरीर अचानक अत्यधिक ऊर्जा उपलब्ध करा देता है।

यदि यह ऊर्जा तुरंत उपयोग न हो, तो वह मांसपेशीय कंपन में बदल सकती है।

इसी कारण कभी-कभी खतरा समाप्त होने के बाद भी शरीर कांपता रहता है।

यह तनाव मुक्त होने की जैविक प्रक्रिया का हिस्सा है।

क्या यह सामान्य है?

अल्पकालिक कंपकंपी सामान्य और सुरक्षित प्रतिक्रिया है।

यह शरीर को संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार करती है।

लेकिन यदि यह प्रतिक्रिया बार-बार या बिना वास्तविक खतरे के हो, तो यह चिंता विकार का संकेत हो सकती है।

ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ परामर्श आवश्यक हो सकता है।


फाइट, फ्लाइट या फ्रीज?

डर की प्रतिक्रिया केवल फाइट या फ्लाइट तक सीमित नहीं है।

तीसरी प्रतिक्रिया “फ्रीज” भी होती है।

इस अवस्था में शरीर अचानक स्थिर हो जाता है।

मस्तिष्क संभावित खतरे का आकलन करता है।

यह प्रतिक्रिया भी अमिग्डाला और ब्रेनस्टेम द्वारा नियंत्रित होती है।

कंपकंपी कब असामान्य मानी जाती है?

यदि कंपकंपी वास्तविक खतरे के बिना बार-बार हो, तो यह चिंता विकार से जुड़ी हो सकती है।

पैनिक अटैक के दौरान तीव्र कंपकंपी, तेज धड़कन और पसीना आ सकता है।

ऐसे मामलों में सहानुभूति तंत्रिका तंत्र अत्यधिक सक्रिय हो जाता है।

यह जैविक प्रतिक्रिया वास्तविक खतरे के बिना भी उत्पन्न हो सकती है।

ब्रेनस्टेम और कंपन नियंत्रण

ब्रेनस्टेम शरीर की मूल प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

अत्यधिक तनाव में न्यूरल सिग्नल अस्थायी रूप से असंतुलित हो सकते हैं।

इससे अनैच्छिक मांसपेशीय गतिविधि बढ़ सकती है।

हालाँकि यह सामान्यतः अस्थायी होती है।

क्या चिकित्सा सहायता आवश्यक है?

यदि कंपकंपी लंबे समय तक बनी रहे या दैनिक जीवन को प्रभावित करे, तो विशेषज्ञ परामर्श लेना चाहिए।

चिंता विकार, थायरॉयड असंतुलन या न्यूरोलॉजिकल स्थितियाँ भी समान लक्षण उत्पन्न कर सकती हैं।

सही निदान के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।

सामान्य डर से उत्पन्न कंपकंपी अल्पकालिक और सुरक्षित होती है।

अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष

डर लगने पर शरीर में कंपकंपी सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की सक्रियता का परिणाम है।

एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल मांसपेशियों को तुरंत क्रिया के लिए तैयार करते हैं।

ऊर्जा की तीव्र उपलब्धता सूक्ष्म कंपन उत्पन्न कर सकती है।

यह शरीर की रक्षा प्रणाली का स्वाभाविक हिस्सा है।

लेकिन यदि यह प्रतिक्रिया बार-बार और बिना कारण हो, तो विशेषज्ञ सलाह लेना उचित है।

मानव शरीर का यह तंत्र दर्शाता है कि भावनाएँ और जैविक प्रक्रियाएँ गहराई से जुड़ी हुई हैं।


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