
SSC CGL क्या है?
SSC CGL का पूरा नाम स्टाफ सिलेक्शन कमीशन कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा है।
यह भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में Group B और Group C पदों के लिए आयोजित की जाती है।
यह परीक्षा देश की सबसे लोकप्रिय और प्रतिस्पर्धी सरकारी परीक्षाओं में से एक है।
हर वर्ष लाखों उम्मीदवार इसमें भाग लेते हैं।
न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता
SSC CGL के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक डिग्री है।
उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से Graduation पूरा होना चाहिए।
कुछ विशिष्ट पदों के लिए विशेष विषय आवश्यक हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए सांख्यिकी से संबंधित पदों के लिए गणित या सांख्यिकी पृष्ठभूमि आवश्यक हो सकती है।
आयु सीमा
आयु सीमा पद के अनुसार भिन्न होती है।
सामान्यतः 18 से 32 वर्ष के बीच की आयु सीमा देखी जाती है।
आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलती है।
सटीक आयु सीमा आधिकारिक अधिसूचना में निर्दिष्ट होती है।
परीक्षा संरचना (वर्तमान पैटर्न के अनुसार)
SSC CGL वर्तमान में दो मुख्य चरणों में आयोजित होती है।
पहला चरण Tier-I कंप्यूटर आधारित परीक्षा है।
दूसरा चरण Tier-II विस्तृत और बहु-पत्र परीक्षा है।
कुछ पदों के लिए कौशल परीक्षण या दस्तावेज सत्यापन भी होता है।
चयन प्रक्रिया
चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होता है।
Tier-I क्वालिफाइंग प्रकृति का हो सकता है।
Tier-II के अंक अंतिम मेरिट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंतिम चयन के बाद दस्तावेज सत्यापन किया जाता है।

Tier-I परीक्षा का स्वरूप
Tier-I एक कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) होती है।
यह वस्तुनिष्ठ प्रकार (Objective Type) की होती है।
प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQ) होते हैं।
नवीनतम पैटर्न के अनुसार यह परीक्षा कुल 200 अंकों की होती है।
प्रश्न वितरण और अंक विभाजन
Tier-I में कुल 100 प्रश्न पूछे जाते हैं।
चार खंड होते हैं — सामान्य बुद्धिमत्ता, सामान्य ज्ञान, गणितीय अभिक्षमता और अंग्रेज़ी समझ।
प्रत्येक खंड में 25 प्रश्न होते हैं।
हर प्रश्न 2 अंक का होता है।
इस प्रकार प्रत्येक खंड 50 अंकों का होता है।
परीक्षा अवधि
परीक्षा की कुल अवधि 60 मिनट होती है।
दिव्यांग उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय प्रदान किया जाता है।
समय प्रबंधन Tier-I में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
औसतन प्रत्येक प्रश्न के लिए लगभग 36 सेकंड उपलब्ध होते हैं।
नकारात्मक अंकन (Negative Marking)
प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.50 अंक की कटौती होती है।
इसलिए अनुमान आधारित उत्तर जोखिमपूर्ण हो सकता है।
रणनीतिक प्रयास आवश्यक है।
सटीकता और गति का संतुलन सफलता की कुंजी है।
विषयवार सिलेबस का विस्तृत विश्लेषण
सामान्य बुद्धिमत्ता में तर्कशक्ति, कोडिंग-डिकोडिंग, श्रृंखला और पज़ल शामिल होते हैं।
गणितीय अभिक्षमता में प्रतिशत, अनुपात, लाभ-हानि, समय-दूरी और बीजगणितीय अवधारणाएँ शामिल हैं।
सामान्य ज्ञान में इतिहास, भूगोल, राजनीति, अर्थव्यवस्था और विज्ञान शामिल होते हैं।
अंग्रेज़ी खंड में व्याकरण, शब्दावली और पठन समझ पूछी जाती है।
क्या Tier-I क्वालिफाइंग है?
हाल के पैटर्न में Tier-I मुख्यतः स्क्रीनिंग चरण के रूप में कार्य करता है।
अर्थात यह अगले चरण के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करता है।
हालाँकि कट-ऑफ अंक अत्यंत प्रतिस्पर्धी होते हैं।
इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

Tier-II परीक्षा का महत्व
SSC CGL में अंतिम मेरिट सूची मुख्यतः Tier-II के अंकों पर आधारित होती है।
यह चरण अधिक विस्तृत और गहन मूल्यांकन करता है।
इसमें विषयों की गहराई Tier-I से अधिक होती है।
इसलिए इसे निर्णायक चरण माना जाता है।
Paper-I (अनिवार्य)
Paper-I सभी उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य है।
इसमें गणितीय क्षमताएँ, तर्कशक्ति, अंग्रेज़ी और सामान्य जागरूकता शामिल हैं।
यह कंप्यूटर आधारित परीक्षा है।
अंक विभाजन नवीनतम अधिसूचना के अनुसार निर्धारित होता है।
नकारात्मक अंकन प्रत्येक गलत उत्तर पर लागू होता है।
गणितीय क्षमताएँ (Advanced Level)
Tier-II में गणित का स्तर स्नातक स्तर के समीप होता है।
बीजगणित, त्रिकोणमिति, ज्यामिति, सांख्यिकी और डेटा व्याख्या महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्नों की जटिलता Tier-I से अधिक होती है।
गति और सटीकता दोनों आवश्यक हैं।
अंग्रेज़ी और तर्कशक्ति
अंग्रेज़ी खंड में उन्नत व्याकरण, वाक्य सुधार और पठन समझ शामिल होते हैं।
तर्कशक्ति में विश्लेषणात्मक और तार्किक प्रश्न पूछे जाते हैं।
यह भाग स्कोरिंग हो सकता है यदि आधार मजबूत हो।
शब्दावली और अभ्यास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Paper-II और Paper-III (विशिष्ट पदों हेतु)
कुछ विशेष पदों के लिए अतिरिक्त पेपर आयोजित किए जाते हैं।
सांख्यिकी पदों के लिए सांख्यिकी पेपर आवश्यक हो सकता है।
वित्त एवं लेखा से संबंधित पदों के लिए वित्त एवं अर्थशास्त्र पेपर हो सकता है।
यह पोस्ट-वाइज चयन प्रक्रिया का हिस्सा है।
नकारात्मक अंकन और समय
Tier-II में भी नकारात्मक अंकन लागू होता है।
गलत उत्तरों पर निर्धारित अंकों की कटौती की जाती है।
समय प्रबंधन और प्रश्न चयन रणनीति अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंतिम मेरिट पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
पोस्ट-वाइज चयन
SSC CGL के अंतर्गत आयकर निरीक्षक, लेखा परीक्षक, सहायक अनुभाग अधिकारी जैसे पद शामिल होते हैं।
कुछ पदों के लिए कंप्यूटर दक्षता या कौशल परीक्षण भी हो सकता है।
दस्तावेज सत्यापन अंतिम चरण में होता है।
इसलिए Tier-II की तैयारी को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

तैयारी कब शुरू करें?
SSC CGL 2026 के लिए कम से कम 6 से 8 माह की योजनाबद्ध तैयारी आदर्श मानी जाती है।
यदि आधार कमजोर है, तो 10 से 12 माह की रणनीति अधिक सुरक्षित हो सकती है।
गणित और तर्कशक्ति में निरंतर अभ्यास अनिवार्य है।
अंग्रेज़ी और सामान्य ज्ञान दैनिक अध्ययन की मांग करते हैं।
6 माह की तैयारी रूपरेखा
पहले 2 माह — अवधारणाएँ मजबूत करें और आधार स्पष्ट करें।
अगले 2 माह — विषयवार अभ्यास और मध्यम स्तर के मॉक टेस्ट।
अंतिम 2 माह — पूर्ण लंबाई के मॉक टेस्ट और समय प्रबंधन।
गलतियों का विश्लेषण सुधार का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
रणनीतिक सुझाव
प्रत्येक दिन कम से कम 2 से 3 घंटे गणित और तर्क पर दें।
सामान्य ज्ञान के लिए विश्वसनीय स्रोत और समसामयिक घटनाएँ पढ़ें।
पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण अनिवार्य है।
सटीकता प्रतिशत 85% से अधिक रखने का लक्ष्य रखें।
आधिकारिक सिलेबस और अधिसूचना कहाँ देखें?
उम्मीदवारों को केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
SSC CGL की नवीनतम अधिसूचना और परीक्षा पैटर्न देखने के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें:
👉 https://ssc.gov.in/for-candidates/cgl-exam/
विस्तृत सिलेबस PDF के लिए SSC का आधिकारिक सिलेबस पृष्ठ देखें:
👉 https://ssc.nic.in/Portal/Syllabus
अधिसूचना जारी होने पर 2026 का सटीक सिलेबस वहीं उपलब्ध होगा।
अंतिम निष्कर्ष
SSC CGL एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा है।
सही रणनीति, समय प्रबंधन और आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयारी सफलता की कुंजी है।
Tier-II को प्राथमिकता दें क्योंकि अंतिम मेरिट मुख्यतः उसी पर आधारित होती है।
नियमित अभ्यास और विश्लेषण ही चयन सुनिश्चित कर सकता है।


