
O रक्त समूह को खास क्यों माना जाता है?
आपने शायद सुना होगा — O रक्त समूह सबको दिया जा सकता है।
इसे “यूनिवर्सल डोनर” कहा जाता है।
लेकिन क्या यह पूरी तरह सच है?
इसका उत्तर थोड़ा वैज्ञानिक है।
रक्त समूह काम कैसे करता है?
हमारे लाल रक्त कणों (RBC) की सतह पर विशेष प्रकार के प्रोटीन होते हैं।
इन्हें एंटीजन कहा जाता है।
अगर किसी व्यक्ति के शरीर में अनजान एंटीजन प्रवेश करे, तो प्रतिरक्षा प्रणाली हमला कर देती है।
इसी कारण गलत रक्त चढ़ाना खतरनाक हो सकता है।
तो O समूह अलग कैसे है?
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार O समूह के लाल रक्त कणों में A या B एंटीजन नहीं होते।
यही कारण है कि शरीर उन्हें “अजनबी” नहीं मानता।
विशेष रूप से O नकारात्मक (O−) सबसे सुरक्षित माना जाता है।
आपातकाल में इसी का उपयोग किया जाता है।

केवल ABO सिस्टम ही पर्याप्त नहीं
रक्त समूह केवल A, B या O नहीं होता।
एक और महत्वपूर्ण तत्व है — Rh फैक्टर।
यदि रक्त में Rh प्रोटीन है, तो वह Rh सकारात्मक है।
अगर नहीं, तो Rh नकारात्मक।
O+ और O− में फर्क
O− को ही वास्तविक यूनिवर्सल डोनर माना जाता है।
O+ हर किसी को नहीं दिया जा सकता।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि Rh असंगति गंभीर प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है।
विशेष रूप से गर्भावस्था में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आधुनिक चिकित्सा क्या कहती है?
रक्त संक्रमण से पहले क्रॉस-मैचिंग टेस्ट किया जाता है।
जलवायु अध्ययनों की तरह यह भी डेटा आधारित प्रक्रिया है।
हर मरीज के लिए सटीक मिलान जरूरी है।

तो क्या O रक्त समूह सबको दिया जा सकता है?
तकनीकी रूप से — केवल O नकारात्मक।
और वह भी आपातकालीन स्थितियों में।
रोज़मर्रा के संक्रमण में सटीक मिलान ही सुरक्षित है।
क्या जोखिम हैं?
गलत रक्त से हेमोलिटिक रिएक्शन हो सकता है।
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार यह जानलेवा भी हो सकता है।
इसीलिए अस्पताल बिना परीक्षण रक्त नहीं चढ़ाते।
अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष
O रक्त समूह विशेष है।
लेकिन “सबको दिया जा सकता है” पूरी तरह सही कथन नहीं।
आधुनिक चिकित्सा सटीकता पर आधारित है।
और रक्त विज्ञान अनुमान पर नहीं, डेटा पर चलता है।


