back to top
होमसामान्य ज्ञानएवरेस्ट की ऊँचाई कैसे मापी जाती है?




संबंधित पोस्ट

विशेष कलाकार

रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

एवरेस्ट की ऊँचाई कैसे मापी जाती है?

माउंट एवरेस्ट दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी ऊँचाई वास्तव में मापी कैसे जाती है। इतनी ऊँचाई को नापना सामान्य माप-यंत्रों से संभव नहीं होता।

एवरेस्ट की ऊँचाई मापने के लिए वैज्ञानिक विशेष गणितीय और भूवैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हैं। इसमें समुद्र तल को आधार मानकर पर्वत की चोटी तक की ऊँचाई निकाली जाती है।

इतिहास में सबसे पहले ब्रिटिश सर्वेक्षणकर्ताओं ने 19वीं शताब्दी में त्रिकोणमिति विधि से इसकी ऊँचाई मापने का प्रयास किया था। उस समय आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं थी, फिर भी गणनाएँ आश्चर्यजनक रूप से सटीक थीं।

आज के समय में एवरेस्ट की ऊँचाई मापना केवल पर्वतारोहियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सैटेलाइट और GPS जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से किया जाता है।

यही वैज्ञानिक प्रक्रिया हमें यह विश्वास दिलाती है कि एवरेस्ट की घोषित ऊँचाई केवल अनुमान नहीं, बल्कि सटीक गणनाओं का परिणाम है।


एवरेस्ट की ऊँचाई मापने की पारंपरिक विधि को त्रिकोणमिति कहा जाता है। इसमें पर्वत से कुछ दूरी पर स्थित एक बिंदु से चोटी तक का कोण मापा जाता है।

जब वैज्ञानिक पर्वत की चोटी तक देखने का कोण और आधार दूरी जानते हैं, तो गणितीय सूत्रों की मदद से ऊँचाई की गणना की जाती है। इस प्रक्रिया में समुद्र तल को आधार रेखा माना जाता है।

उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश सर्वेक्षणकर्ताओं ने इसी विधि का उपयोग करके पहली बार एवरेस्ट की ऊँचाई का अनुमान लगाया था, जो आज के आधुनिक माप से काफी करीब था।

आधुनिक समय में त्रिकोणमिति के साथ-साथ GPS तकनीक का भी उपयोग किया जाता है। पर्वत की चोटी पर GPS उपकरण लगाकर पृथ्वी के केंद्र से सटीक दूरी मापी जाती है।

इन सभी मापों को जोड़कर वैज्ञानिक यह तय करते हैं कि एवरेस्ट की ऊँचाई कितनी है और समय के साथ उसमें कोई बदलाव हुआ है या नहीं।


आधुनिक युग में एवरेस्ट की ऊँचाई मापने के लिए सैटेलाइट और GPS तकनीक का उपयोग किया जाता है। पर्वत की चोटी पर GPS रिसीवर स्थापित किया जाता है, जो पृथ्वी के केंद्र से अपनी सटीक स्थिति की गणना करता है।

इसके साथ ही समुद्र तल की सटीक परिभाषा तय करना भी आवश्यक होता है। वैज्ञानिक जियोइड मॉडल का उपयोग करते हैं, जो यह बताता है कि पृथ्वी का औसत समुद्र तल वास्तव में कहाँ स्थित है।

एवरेस्ट की ऊँचाई स्थिर नहीं रहती, क्योंकि हिमालय क्षेत्र टेक्टॉनिक प्लेटों के टकराव से लगातार ऊपर उठ रहा है। भूकंप और भूगर्भीय हलचल भी इसकी ऊँचाई में हल्का परिवर्तन ला सकती है।

इसी कारण नेपाल और चीन समय-समय पर संयुक्त सर्वेक्षण करते हैं। वर्ष 2020 में दोनों देशों ने एवरेस्ट की आधिकारिक ऊँचाई 8,848.86 मीटर घोषित की, जिसमें बर्फ की मोटाई को भी शामिल किया गया।

इस प्रकार एवरेस्ट की ऊँचाई किसी एक अनुमान का परिणाम नहीं, बल्कि गणित, भूविज्ञान, सैटेलाइट विज्ञान और निरंतर निगरानी का संयुक्त निष्कर्ष है।


नवीनतम पोस्ट



भविष्य की तकनीकें जो दुनिया बदल देंगी

भविष्य की तकनीकें इंसान के सोचने, काम करने और जीने के तरीके को पूरी तरह बदलने वाली हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, IoT, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक्नोलॉजी से दुनिया एक नए युग में प्रवेश कर रही है…

महान भारतीय वैज्ञानिक और उनके आविष्कार

भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महान वैज्ञानिकों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता और कठिन परिश्रम से देश और दुनिया को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इन वैज्ञानिकों के आविष्कारों और खोजों ने न केवल वैज्ञानिक समुदाय को प्रभावित किया, बल्कि आम लोगों के जीवन में भी महत्वपूर्ण बदलाव...

कंप्यूटर नेटवर्क क्या होता है

कंप्यूटर नेटवर्क (Computer Network) एक तरीका है जिसके माध्यम से विभिन्न कंप्यूटर और उपकरण आपस में जुड़े होते हैं ताकि वे डेटा और संसाधनों...

समुद्र का रंग नीला ही क्यों दिखता है?

एक साधारण सवाल, लेकिन गहरा विज्ञानजब भी हम समुद्र की ओर देखते हैं, एक बात लगभग हमेशा समान रहती है—उसका नीला रंग। चाहे वह...

दुनिया की पहली सभ्यता कौन-सी थी और कैसे बनी?

दुनिया की पहली सभ्यता कौन-सी थी? यह लेख बताएगा कि इंसान शिकारी जीवन से शहरों तक कैसे पहुँचा, नदी किनारे सभ्यताएँ क्यों उभरीं और सुमेरियन सभ्यता को पहली क्यों माना जाता है।

क्या ब्रह्मांड का कोई अंत है?

क्या ब्रह्मांड कहीं खत्म होता है या यह अनंत है? यह लेख आधुनिक खगोल विज्ञान, बिग बैंग सिद्धांत और वैज्ञानिक मॉडलों के आधार पर ब्रह्मांड के अंत की गहराई से पड़ताल करता है।

कैलाश पर्वत का रहस्य

कैलाश पर्वत, कैलाश रेंज की सबसे ऊंची चोटी है। जो तिब्बत, नेपाल और भारत में फैली हुई है। इसके अलावा, यह चीन के तिब्बती...

क्यों कौवे इंसानों को कभी नहीं भूलते?

क्या कौवे इंसानों को पहचान कर सालों तक याद रखते हैं? आधुनिक न्यूरोसाइंस और व्यवहारिक विज्ञान बताता है कि कौवों की याददाश्त, चेहरे पहचानने की क्षमता और सामाजिक बुद्धिमत्ता इंसानों को भी चौंका देती है।

एटाकामा: धरती का सबसे सूखा स्थान

एटाकामा रेगिस्तान धरती का सबसे सूखा स्थान क्यों है? जानिए यहां वर्षों तक बारिश न होने का वैज्ञानिक कारण, अद्भुत जीवन, NASA के प्रयोग और वह रहस्य जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया।

बिग बैंग 🌌 अंतरिक्ष का जन्म

बिग बैंग—ब्रह्मांड का जन्म कैसे हुआ? इस ऑडियोबुक में जानें ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों और आकाशगंगाओं का निर्माण, अंतरिक्ष के फैलाव की प्रक्रिया और वे रहस्य जिन्हें बिग बैंग थ्योरी आज भी उजागर करने की कोशिश कर रही है…

लोग नाखुश होकर भी नौकरी क्यों नहीं छोड़ पाते?

लोग अक्सर नौकरी से खुश नहीं होते, फिर भी आर्थिक असुरक्षा, सामाजिक दबाव, आत्मविश्वास की कमी और भविष्य के डर के कारण बदलाव का जोखिम नहीं उठा पाते। यह मानसिक जड़ता उन्हें उसी स्थिति में बांधे रखती है।

सूरज कब और कैसे खत्म होगा?

सूरज तुरंत नहीं बल्कि अरबों वर्षों में समाप्त होगा। जब उसका हाइड्रोजन ईंधन खत्म होगा, तब वह लाल दानव बनेगा और अंततः अपने बाहरी हिस्से खोकर एक सफेद बौने तारे में बदल जाएगा।

सूरज हर सेकंड इतनी ऊर्जा कैसे पैदा करता है?

सूरज हर सेकंड अपार ऊर्जा इसलिए पैदा करता है क्योंकि उसके केंद्र में नाभिकीय संलयन होता है, जहां हाइड्रोजन परमाणु मिलकर हीलियम बनाते हैं और द्रव्यमान ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।

विज्ञान ने जिसे नामुमकिन कहा, वही सच निकला

इतिहास में कई बार विज्ञान ने कुछ बातों को नामुमकिन कहा, लेकिन समय ने उन्हें सच साबित कर दिया। यह लेख उन खोजों की कहानी है, जिन्होंने विज्ञान की सीमाएँ बदल दीं।

दिल्ली का लौह स्तंभ क्यों नहीं जंग खाता?

दिल्ली का लौह स्तंभ 1600 साल बाद भी बिना जंग के खड़ा है। जानिए इसके पीछे छिपा प्राचीन भारतीय धातुकर्म, विज्ञान, रसायन शास्त्र और वह रहस्य जिसने आधुनिक वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया।

आधार कार्ड से जुड़े 10 नियम जो ज़्यादातर लोगों को नहीं पता

आधार कार्ड से जुड़े ऐसे 10 कानूनी और व्यावहारिक नियम जिन्हें ज़्यादातर लोग नहीं जानते। यह लेख बताएगा कि कब आधार देना ज़रूरी नहीं, आपके अधिकार क्या हैं और कहाँ सावधानी ज़रूरी है।

Facebook Monetization के लिए क्या–क्या गलतियाँ न करें

Facebook Monetization में रिजेक्शन क्यों होता है? यह लेख उन आम लेकिन महँगी गलतियों को विस्तार से बताता है, जिन्हें करने से क्रिएटर्स की कमाई, रीच और अकाउंट हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाते हैं।

विश्व सामान्य ज्ञान – भाग दो

कई प्रतियोगी परीक्षाओं में तथा विभिन्न कक्षाओं के सामान्य ज्ञान के विषय में प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए हम आपके ज्ञान को मनोरंजन के...

विज्ञान – सामान्य ज्ञान – भाग एक

विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या...

नींद आते-आते अचानक झटका क्यों लगता है?

नींद आते समय अचानक झटका क्यों लगता है? यह लेख Hypnic Jerk के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों, दिमाग और मांसपेशियों के तालमेल, तनाव और नींद के चक्र को सरल भाषा में समझाता है।


error: Content is protected !!