
एक औरत नाचना शुरू करती है…
साल 1518। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग शहर की एक साधारण-सी सुबह।
एक महिला सड़क पर अचानक नाचने लगती है।
न संगीत। न त्योहार। न कोई कारण।
वह रुकती नहीं। घंटों तक। दिनों तक।
फिर क्या हुआ?
कुछ ही दिनों में दर्जनों लोग उसके साथ नाचने लगे।
इतिहासकारों के अनुसार एक महीने के भीतर लगभग 400 लोग बिना रुके नाच रहे थे।
वे थककर गिर जाते, फिर उठकर दोबारा नाचने लगते।
मौत तक नाचना
कुछ लोग हृदयाघात से मरे। कुछ थकावट से।
यह कोई उत्सव नहीं था। यह भय था।
और यह इतिहास की सबसे अजीब घटनाओं में दर्ज हो गया।
इसे आज हम कहते हैं — डांसिंग प्लेग 1518।

क्या यह बीमारी थी… या सामूहिक उन्माद?
1518 का यूरोप भुखमरी, बीमारी और धार्मिक भय से भरा हुआ था।
लगातार अकाल, चेचक और सामाजिक अस्थिरता ने लोगों के मानसिक संतुलन को झकझोर दिया था।
सामूहिक मनोवैज्ञानिक रोग
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार ऐसी घटनाएँ सामूहिक मनोदैहिक विकार “Mass Psychogenic Illness” के रूप में जानी जाती हैं।
जब अत्यधिक तनाव पूरे समुदाय में फैलता है, तो शरीर असामान्य प्रतिक्रिया दे सकता है।
यह प्रतिक्रिया सचेत निर्णय नहीं होती — यह अवचेतन विस्फोट होती है।
मस्तिष्क के अंदर क्या होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक भय और तनाव अमिगडाला को सक्रिय कर देता है।
अमिगडाला खतरे का संकेत देता है, भले ही वास्तविक खतरा मौजूद न हो।
कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन लगातार बढ़ते रहते हैं।
शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड में अटक जाता है।
लेकिन नाच क्यों?
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि यह धार्मिक उन्माद का परिणाम था।
लोगों को विश्वास था कि वे संत विटस के श्राप से ग्रस्त हैं।
भय ने शरीर को अनियंत्रित गति में धकेल दिया।
और सामूहिक डर संक्रमण की तरह फैल गया।

एरगॉट फंगस सिद्धांत क्या कहता है?
कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि 1518 की घटना एक विषाक्त फंगस के कारण हुई।
यह फंगस राई (Rye) अनाज पर उगता है, जिसे “एरगॉट (Ergot)” कहा जाता है।
जलवायु अध्ययनों में पाया गया कि उस समय यूरोप में नमी और गर्मी अधिक थी।
ऐसी स्थिति Ergot संक्रमण के लिए आदर्श होती है।
एरगॉट शरीर पर क्या असर करता है?
Ergot में मौजूद रसायन LSD “लाइसरजिक एसिड डाइएथाइलामाइड” (Lysergic Acid Diethylamide) जैसे प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
यह मस्तिष्क पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावना, और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है।
इसके प्रभाव में व्यक्ति को ऐसी चीजें दिख सकती हैं या महसूस हो सकती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं। इसलिए LSD जैसे रसायन को मनो-सक्रिय (psychoactive) पदार्थ माना जाता है।
यह मतिभ्रम, अनियंत्रित मांसपेशी संकुचन और तंत्रिका उत्तेजना पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि एरगॉट विषाक्तता झटकों और ऐंठन का कारण बन सकती है।
लेकिन — क्या इससे हफ्तों तक नाचना संभव है?
वैज्ञानिक बहस आज भी जारी है
कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि केवल एरगॉट इतनी लंबी घटना को नहीं समझा सकता।
दूसरे विशेषज्ञ कहते हैं कि सामूहिक मनोवैज्ञानिक तनाव अधिक तार्किक व्याख्या है।
संभव है — दोनों कारण एक साथ मौजूद रहे हों।
अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार 1518 की डांसिंग प्लेग पूरी तरह समझी नहीं जा सकी है।
यह इतिहास, मनोविज्ञान और जैव रसायन का संगम है।
यह हमें सिखाती है कि जब समाज तनाव में डूबता है, तो शरीर भी विद्रोह कर सकता है।
और कभी-कभी — वह विद्रोह नृत्य के रूप में प्रकट होता है।


