
भूकंप क्या होता है?
भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे अचानक होने वाली ऊर्जा के विस्फोट का परिणाम होता है।
जब पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या दबाव सहन नहीं कर पातीं, तब ज़मीन हिलने लगती है—इसे ही भूकंप कहा जाता है।
भारत भूकंप के लिहाज़ से संवेदनशील क्यों है?
भारत की भौगोलिक स्थिति इसे भूकंप के लिए स्वाभाविक रूप से संवेदनशील बनाती है।
भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। यही टक्कर हिमालय पर्वत श्रृंखला के बनने और भूकंपों के आने का मुख्य कारण है।
क्या पूरे भारत में भूकंप का खतरा समान है?
नहीं। भारत के कुछ क्षेत्र अत्यधिक भूकंप-प्रवण हैं, जबकि कुछ इलाकों में जोखिम अपेक्षाकृत कम है।
इसी आधार पर भारत को भूकंप के चार प्रमुख ज़ोन (Zone II से Zone V) में बाँटा गया है।
हाल के वर्षों में भूकंप क्यों बढ़ते दिख रहे हैं?
तेज़ शहरीकरण, ऊँची इमारतें, बाँध निर्माण और प्राकृतिक असंतुलन ने भूकंप के प्रभाव को और अधिक गंभीर बना दिया है।
हालाँकि भूकंपों की संख्या नहीं, बल्कि उनके प्रभाव और नुकसान ज़्यादा महसूस किए जा रहे हैं।

हिमालयी क्षेत्र: सबसे बड़ा खतरा
भारत में भूकंप का सबसे अधिक खतरा हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम जैसे राज्य बार-बार भूकंप का अनुभव करते हैं।
इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट के नीचे धँस रही है, जिससे ज़मीन के भीतर अत्यधिक तनाव जमा होता है।
उत्तर-पूर्व भारत क्यों इतना संवेदनशील है?
असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम और नागालैंड भारत के सबसे भूकंप-संवेदनशील इलाकों में आते हैं।
यह क्षेत्र कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों और प्लेट सीमाओं के संगम पर स्थित है।
इतिहास के कुछ सबसे शक्तिशाली भूकंप—जैसे 1950 का असम भूकंप—इसी क्षेत्र में आए हैं।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत
दिल्ली-एनसीआर भले ही हिमालय में न हो, लेकिन यह कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों के क़रीब स्थित है।
यमुना और अरावली क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना इसे मध्यम से उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बनाती है।
घनी आबादी और ऊँची इमारतें भूकंप के प्रभाव को और अधिक खतरनाक बना देती हैं।
पश्चिमी भारत और कच्छ क्षेत्र
गुजरात का कच्छ क्षेत्र भी भूकंप के लिहाज़ से अत्यधिक संवेदनशील है।
2001 का भुज भूकंप इसी क्षेत्र की सक्रिय फॉल्ट लाइनों का परिणाम था।
यह क्षेत्र प्राचीन लेकिन अभी भी सक्रिय भूगर्भीय दरारों से भरा हुआ है।
भारत के भूकंप ज़ोन क्या बताते हैं?
भारत को चार भूकंप ज़ोन—Zone II, III, IV और V—में बाँटा गया है।
Zone V सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र है, जिसमें हिमालयी और उत्तर-पूर्वी इलाके आते हैं।

भूकंप का नुकसान कैसे कम किया जा सकता है?
भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी से उसके प्रभाव को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है।
भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में इमारतों का निर्माण भूकंप-रोधी मानकों के अनुसार किया जाना बेहद ज़रूरी है।
शहरीकरण और निर्माण की भूमिका
तेज़ी से हो रहा शहरीकरण भारत में भूकंप के खतरे को और गंभीर बना रहा है।
बिना मानकों के बनी इमारतें, अवैध निर्माण और पुरानी संरचनाएँ सबसे अधिक नुकसान झेलती हैं।
भूकंप के समय क्या करें?
भूकंप के दौरान घबराने की बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना ज़रूरी होता है।
मेज़ या मज़बूत फर्नीचर के नीचे बैठना, सिर को ढकना और लिफ्ट का उपयोग न करना प्राथमिक उपाय हैं।
क्या भविष्य में भूकंप की भविष्यवाणी संभव है?
वर्तमान विज्ञान भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम नहीं है।
हालाँकि, जोखिम मानचित्रण, बेहतर सेंसर और चेतावनी प्रणालियाँ नुकसान को कम करने में मदद कर सकती हैं।
निष्कर्ष
भारत में भूकंप का खतरा एक भूगर्भीय वास्तविकता है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
वैज्ञानिक समझ, सुरक्षित निर्माण और जन-जागरूकता ही इससे निपटने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
तैयारी ही सुरक्षा है—और यही भूकंप से बचाव की सबसे मज़बूत कुंजी है।
