
हंड्रेड ईयर्स वॉर क्या था?
हंड्रेड ईयर्स वॉर इंग्लैंड और फ्रांस के बीच लड़ा गया एक दीर्घकालिक युद्ध था।
यह युद्ध १३३७ में प्रारंभ हुआ और १४५३ में समाप्त हुआ।
कुल अवधि लगभग ११६ वर्ष रही।
इसी कारण इसे इतिहास का सबसे लंबा पारंपरिक राजकीय युद्ध माना जाता है।
युद्ध का मुख्य कारण
संघर्ष की जड़ फ्रांस के सिंहासन के उत्तराधिकार विवाद में थी।
१३२८ में फ्रांसीसी राजा चार्ल्स चतुर्थ की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय ने स्वयं को फ्रांस का वैध उत्तराधिकारी घोषित किया।
फ्रांसीसी कुलीनों ने फिलिप षष्ठम को राजा बनाया।
यहीं से दोनों शक्तियों के बीच टकराव शुरू हुआ।
प्रारंभिक चरण की लड़ाइयाँ
१३४६ में क्रेसी का युद्ध इंग्लैंड की बड़ी जीत थी।
१३५६ में पोइटियर्स की लड़ाई में फ्रांसीसी राजा जॉन द्वितीय को बंदी बना लिया गया।
इंग्लैंड की लॉन्गबो रणनीति ने युद्ध का रुख बदल दिया।
इस तकनीकी बढ़त ने प्रारंभिक दशकों में इंग्लैंड को बढ़त दी।
क्या यह लगातार १०० वर्ष तक चला?
युद्ध लगातार नहीं चला।
इसमें कई संघर्षविराम और अस्थायी शांति समझौते हुए।
फिर भी कुल संघर्ष काल ११६ वर्षों तक फैला रहा।
इसी कारण इसे “हंड्रेड ईयर्स वॉर” कहा गया।

१४१५: एजिनकोर्ट की निर्णायक लड़ाई
२५ अक्टूबर १४१५ को एजिनकोर्ट की लड़ाई हुई।
इंग्लैंड के राजा हेनरी पंचम ने फ्रांस की सेना को हराया।
संख्या में कम होने के बावजूद इंग्लैंड की लॉन्गबो रणनीति प्रभावी साबित हुई।
इस जीत ने फ्रांस को गंभीर संकट में डाल दिया।
१४२० की ट्रोय संधि के तहत इंग्लैंड को फ्रांसीसी उत्तराधिकार में मान्यता मिली।
जोन ऑफ आर्क का उदय (१४२९)
१४२९ में एक युवा किसान लड़की, जोन ऑफ आर्क, इतिहास में उभरी।
उसने दावा किया कि उसे दिव्य निर्देश प्राप्त हुए हैं।
उसने फ्रांसीसी युवराज चार्ल्स सप्तम को समर्थन देने का आह्वान किया।
उसी वर्ष उसने ऑरलियॉं की घेराबंदी समाप्त करवाई।
यह घटना युद्ध का निर्णायक मोड़ बनी।
राष्ट्रीय भावना का उदय
जोन ऑफ आर्क ने केवल सैन्य रणनीति नहीं बदली।
उसने फ्रांस में राष्ट्रीय भावना को मजबूत किया।
चार्ल्स सप्तम का राज्याभिषेक १४२९ में रीम्स में हुआ।
यह फ्रांस के लिए मनोवैज्ञानिक विजय थी।
इतिहासकारों के अनुसार यह युद्ध के अंतिम चरण की शुरुआत थी।
जोन का अंत और प्रभाव
१४३० में जोन को बर्गंडियन सैनिकों ने पकड़ लिया।
१४३१ में उसे इंग्लैंड समर्थित न्यायालय द्वारा मृत्युदंड दिया गया।
उसे जिंदा जला दिया गया।
हालाँकि उसकी मृत्यु ने फ्रांस की एकता और संघर्ष भावना को और मजबूत किया।
१४५३ तक फ्रांसीसी सेना ने अधिकांश क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण पा लिया।

१४५३: निर्णायक वर्ष
हंड्रेड ईयर्स वॉर का अंतिम निर्णायक चरण १४५३ में आया।
कैस्टिलॉन की लड़ाई में फ्रांसीसी सेना ने इंग्लैंड को पराजित किया।
यह लड़ाई १७ जुलाई १४५३ को हुई।
तोपों के संगठित उपयोग ने युद्ध की दिशा बदल दी।
इसे मध्ययुगीन यूरोप में आधुनिक तोपखाने की शुरुआत माना जाता है।
इंग्लैंड की हार और क्षेत्रीय परिवर्तन
१४५३ के बाद इंग्लैंड ने फ्रांस में लगभग सभी क्षेत्र खो दिए।
केवल कैलैस कुछ समय तक उसके पास रहा।
इस पराजय ने इंग्लैंड की आंतरिक राजनीति को प्रभावित किया।
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इसके बाद १४५५ में वॉर्स ऑफ द रोज़ेज की पृष्ठभूमि बनी।
फ्रांस में केंद्रीकरण की शुरुआत
इस युद्ध के बाद फ्रांस में शाही सत्ता मजबूत हुई।
चार्ल्स सप्तम और उनके उत्तराधिकारियों ने स्थायी सेना की स्थापना की।
केंद्रीकृत प्रशासनिक ढाँचा विकसित हुआ।
यह आधुनिक राष्ट्र-राज्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
राष्ट्रीयता का उदय
हंड्रेड ईयर्स वॉर ने फ्रांस और इंग्लैंड दोनों में राष्ट्रीय पहचान को मजबूत किया।
पहली बार लोगों ने स्वयं को केवल क्षेत्रीय नागरिक नहीं, बल्कि एक राष्ट्र का हिस्सा समझना शुरू किया।
इतिहासकारों के अनुसार यह यूरोप में आधुनिक राष्ट्रवाद की प्रारंभिक नींव थी।
सैन्य तकनीक में बदलाव
लॉन्गबो और बाद में तोपखाने के उपयोग ने पारंपरिक शूरवीर युद्ध प्रणाली को कमजोर किया।
किलेबंदी और सैन्य रणनीतियों में परिवर्तन हुआ।
युद्ध ने मध्ययुगीन से आधुनिक युद्ध शैली की ओर संक्रमण को तेज किया।
अंतिम निष्कर्ष
१३३७ से १४५३ तक चला हंड्रेड ईयर्स वॉर इतिहास का सबसे लंबा पारंपरिक राजकीय युद्ध था।
११६ वर्षों तक फैले इस संघर्ष ने यूरोप की राजनीतिक संरचना बदल दी।
इसने आधुनिक राष्ट्र-राज्य, सैन्य नवाचार और राष्ट्रीय पहचान को आकार दिया।
यह केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि यूरोपीय इतिहास का परिवर्तनकारी अध्याय था।


