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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

क्या लंबे समय तक बैठना धूम्रपान जितना खतरनाक है?

हम दिन में कितना समय बैठते हैं?

सुबह ऑफिस की कुर्सी, दोपहर मीटिंग, शाम को टीवी या मोबाइल।

आधुनिक जीवनशैली ने चलना-फिरना कम और बैठना ज़्यादा कर दिया है।

कई लोग दिन में 8 से 10 घंटे तक लगातार बैठे रहते हैं।

इसे “नया धूम्रपान” क्यों कहा गया?

कुछ अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लंबे समय तक बैठने को “नया धूम्रपान” कहा।

यह तुलना चौंकाने वाली थी। क्या सच में कुर्सी सिगरेट जितनी खतरनाक हो सकती है?

वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार लगातार बैठना समयपूर्व मृत्यु के जोखिम से जुड़ा है।

समस्या सिर्फ व्यायाम की कमी नहीं है

शोध बताते हैं कि रोज़ व्यायाम करने वाले लोग भी यदि दिनभर बैठे रहें तो जोखिम बना रहता है।

इसका मतलब है कि समस्या केवल “एक्सरसाइज न करना” नहीं, बल्कि लगातार निष्क्रिय रहना है।

यह शरीर की मूल जैविक प्रणाली को प्रभावित करता है।


मेटाबोलिज्म क्यों धीमा पड़ जाता है?

जब हम लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो हमारी बड़ी मांसपेशियाँ लगभग निष्क्रिय हो जाती हैं।

मांसपेशियाँ शरीर की सबसे बड़ी ऊर्जा खपत प्रणाली हैं। इनके शांत होते ही कैलोरी जलना कम हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यह धीमा मेटाबोलिज्म वजन बढ़ने और चर्बी जमा होने की शुरुआत कर सकता है।

इंसुलिन प्रतिरोध कैसे बढ़ता है?

लगातार बैठने से कोशिकाएँ ग्लूकोज़ को कम कुशलता से ग्रहण करती हैं।

जलवायु अध्ययनों की तरह स्वास्थ्य अनुसंधान में भी पाया गया है कि निष्क्रिय जीवनशैली टाइप 2 मधुमेह के जोखिम से जुड़ी है।

वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार सिर्फ 3–4 घंटे लगातार बैठने से इंसुलिन संवेदनशीलता घट सकती है।

हृदय और रक्त प्रवाह पर असर

बैठे रहने पर रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है। विशेषकर पैरों में।

इससे रक्त के थक्के बनने और उच्च रक्तचाप का जोखिम धीरे-धीरे बढ़ सकता है।

हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहना कोरोनरी हृदय रोग से जुड़ा पाया गया है।

सिर्फ व्यायाम काफी क्यों नहीं?

कई शोधों में यह पाया गया कि दिन में 30 मिनट व्यायाम कर लेने से जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता यदि बाकी दिन लगातार बैठा जाए।

शरीर को नियमित अंतराल पर चलना और खड़ा होना आवश्यक है।

समस्या “व्यायाम की कमी” नहीं, बल्कि “गतिविधि की अनुपस्थिति” है।


क्या तुलना सही है?

“बैठना नया धूम्रपान है” यह वाक्य लोकप्रिय है, लेकिन क्या यह पूरी तरह सही है?

वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार धूम्रपान सीधे फेफड़ों, डीएनए और कैंसर जोखिम से जुड़ा है।

लंबे समय तक बैठना उसी तरह त्वरित विषाक्त प्रभाव नहीं डालता, लेकिन यह धीरे-धीरे मेटाबोलिक और हृदय जोखिम बढ़ाता है।

जोखिम किस स्तर का है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि निष्क्रिय जीवनशैली हृदय रोग, मधुमेह और मोटापे से मजबूत रूप से जुड़ी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्टों में शारीरिक निष्क्रियता को समयपूर्व मृत्यु के शीर्ष जोखिम कारकों में गिना गया है।

हालाँकि यह कहना कि बैठना “धूम्रपान जितना” खतरनाक है, एक सरलीकरण है।

वास्तविक समस्या क्या है?

समस्या बैठने में नहीं, लगातार और बिना ब्रेक बैठने में है।

जलवायु अध्ययनों की तरह स्वास्थ्य अध्ययनों में भी “डोज़ और अवधि” महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हर 30–40 मिनट में 2–5 मिनट चलना रक्त प्रवाह और ग्लूकोज़ नियंत्रण सुधार सकता है।

अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष

लंबे समय तक बैठना एक “धीमा जोखिम” है।

यह तुरंत नुकसान नहीं देता, लेकिन वर्षों में बीमारियों का आधार बना सकता है।

इसका समाधान जटिल नहीं है— अधिक बार खड़े हों, चलें, और दिनभर सूक्ष्म गतिविधि जोड़ें।

धूम्रपान एक सक्रिय विष है। बैठना एक निष्क्रिय खतरा।

दोनों अलग हैं— लेकिन दोनों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।


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