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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

धूप में बैठने से सच में विटामिन D बनता है?

क्या धूप सिर्फ गर्मी देती है?

हम बचपन से सुनते आए हैं — धूप में बैठो, शरीर को ताकत मिलेगी।

लेकिन क्या यह केवल परंपरा है, या इसके पीछे वास्तविक विज्ञान है?

सच यह है — धूप शरीर में विटामिन D बनाने की प्रक्रिया शुरू करती है।

विटामिन D क्यों जरूरी है?

विटामिन D हड्डियों को मजबूत रखने, कैल्शियम के अवशोषण और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी कमी से कमजोर हड्डियाँ, थकान और प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट हो सकती है।

साल 2026 की कई स्वास्थ्य रिपोर्टों में पाया गया कि शहरी आबादी में विटामिन D की कमी बढ़ रही है।

धूप कैसे बनाती है विटामिन D?

त्वचा में एक यौगिक मौजूद होता है — 7-डिहाइड्रोकोलेस्ट्रॉल (7-dehydrocholesterol)।

जब यह सूर्य की UVB किरणों के संपर्क में आता है, तो रासायनिक परिवर्तन शुरू होता है।

यही प्रक्रिया प्रारंभिक विटामिन D का निर्माण करती है, जो बाद में लिवर और किडनी में सक्रिय रूप लेता है।

वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया कि यह प्रक्रिया केवल UVB किरणों से संभव है — सिर्फ रोशनी से नहीं।

सिर्फ धूप नहीं, सही धूप जरूरी है

हर धूप विटामिन D नहीं बनाती।

केवल UVB किरणें ही त्वचा में रासायनिक प्रक्रिया शुरू करती हैं।

सुबह बहुत जल्दी या शाम की धूप में UVB स्तर कम होता है।

इसलिए दोपहर के आसपास की धूप सबसे प्रभावी मानी जाती है।

कितनी देर धूप में बैठना चाहिए?

वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार 10 से 30 मिनट की धूप अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त हो सकती है।

लेकिन यह समय त्वचा के रंग, स्थान और मौसम पर निर्भर करता है।

गहरी त्वचा में अधिक मेलेनिन होता है, जो UVB को आंशिक रूप से अवरुद्ध करता है।

इस कारण गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों को थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

क्या सनस्क्रीन विटामिन D रोक देता है?

सैद्धांतिक रूप से, उच्च SPF सनस्क्रीन UVB को रोक सकता है।

लेकिन जलवायु अध्ययनों में पाया गया कि सामान्य जीवन स्थितियों में लोग पर्याप्त धूप फिर भी प्राप्त कर लेते हैं।

पूरी तरह बिना सुरक्षा लंबे समय तक धूप में रहना त्वचा कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।

इसलिए संतुलन जरूरी है — ना अत्यधिक धूप, ना पूरी तरह परहेज।

क्या कांच के पीछे बैठने से फायदा होता है?

यह एक आम भ्रम है।

कांच UVB किरणों को लगभग पूरी तरह रोक देता है।

इसलिए खिड़की के पीछे बैठने से विटामिन D नहीं बनता।

सीधा सूर्य संपर्क आवश्यक है।

आधुनिक जीवन और विटामिन D की कमी

आज हम पहले से अधिक घरों और दफ्तरों के अंदर रहते हैं।

लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, एयर-कंडीशन्ड कमरों में रहना, और धूप से बचना — यह सब सामान्य हो चुका है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यही कारण है कि विश्वभर में विटामिन D की कमी बढ़ रही है।

भारत जैसे धूप वाले देश में भी कमी के मामले आश्चर्यजनक रूप से अधिक हैं।

विटामिन D की कमी से क्या होता है?

वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार विटामिन D हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक है।

यह कैल्शियम के अवशोषण में मुख्य भूमिका निभाता है।

कमी होने पर हड्डियाँ कमजोर हो सकती हैं, मांसपेशियों में दर्द बढ़ सकता है, और बच्चों में रिकेट्स जैसी समस्या हो सकती है।

वयस्कों में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा काफी बढ़ जाता है।

क्या केवल धूप पर्याप्त है?

हर व्यक्ति के लिए धूप की मात्रा अलग हो सकती है।

त्वचा का रंग, भौगोलिक स्थान, उम्र, और जीवनशैली — ये सभी कारक प्रभाव डालते हैं।

जलवायु अध्ययनों में पाया गया कि प्रदूषण भी UVB किरणों को रोक सकता है।

यानी केवल धूप में खड़े होना हमेशा पर्याप्त नहीं होता।

तो सही तरीका क्या है?

संतुलित धूप लेना सबसे प्राकृतिक तरीका है।

सप्ताह में 3–4 दिन 10–20 मिनट तक सुबह की हल्की धूप अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त हो सकती है।

लेकिन यदि कमी गंभीर हो, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना आवश्यक हो सकता है।

धूप से डरना नहीं, बल्कि उसे समझना जरूरी है।

विटामिन D केवल एक पोषक तत्व नहीं — यह शरीर की प्रतिरक्षा, हड्डियों, और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ आधार है।


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