back to top
होमसामान्य ज्ञानसंविधान में संशोधन करना इतना कठिन क्यों है?




संबंधित पोस्ट

विशेष कलाकार

रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

संविधान में संशोधन करना इतना कठिन क्यों है?

भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक आत्मा है। इसलिए इसमें कोई भी बदलाव करना आसान नहीं बनाया गया है।

संविधान निर्माताओं का मानना था कि यदि संशोधन बहुत सरल होगा, तो भविष्य की सरकारें अपने हित में मूल सिद्धांतों को कमजोर कर सकती हैं।

इसी कारण संविधान में संशोधन के लिए सामान्य कानूनों की तुलना में कहीं अधिक कठोर प्रक्रिया रखी गई है, ताकि हर बदलाव सोच-समझकर किया जाए।

संविधान का उद्देश्य सत्ता को सीमित करना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। आसान संशोधन प्रक्रिया इस संतुलन को बिगाड़ सकती थी।

इसलिए संविधान में संशोधन को कठिन बनाकर यह सुनिश्चित किया गया कि लोकतंत्र की बुनियाद स्थिर और सुरक्षित बनी रहे।


भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया जानबूझकर जटिल रखी गई है। किसी भी संशोधन प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में विशेष बहुमत से पारित करना आवश्यक होता है।

विशेष बहुमत का अर्थ है कि केवल उपस्थित सदस्यों का बहुमत ही नहीं, बल्कि कुल सदस्यों का भी बहुमत समर्थन में होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संशोधन व्यापक सहमति से ही हो।

कुछ संवैधानिक संशोधनों के लिए केवल संसद की सहमति पर्याप्त नहीं होती। यदि संशोधन राज्यों के अधिकारों या संघीय ढांचे से जुड़ा है, तो कम से कम आधे राज्यों की स्वीकृति भी अनिवार्य होती है।

यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि केंद्र सरकार अकेले संविधान की मूल संरचना में बदलाव न कर सके और राज्यों की भूमिका सुरक्षित रहे।

इस पूरी प्रक्रिया में समय, बहस और सहमति की आवश्यकता संविधान को राजनीतिक जल्दबाज़ी से बचाती है और लोकतंत्र को स्थायित्व प्रदान करती है।


संविधान में संशोधन की कठिनाई का एक बड़ा कारण न्यायपालिका की भूमिका भी है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि संसद संविधान की मूल संरचना को नहीं बदल सकती।

इसे ही “बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन” कहा जाता है। इसका अर्थ है कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्यायिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार जैसे मूल सिद्धांत किसी भी संशोधन से समाप्त नहीं किए जा सकते।

यदि संसद द्वारा किया गया कोई संशोधन इन मूल तत्वों को नुकसान पहुँचाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। यह व्यवस्था संविधान को सत्ता के दुरुपयोग से बचाती है।

इस प्रकार संशोधन प्रक्रिया केवल संसद तक सीमित नहीं रहती, बल्कि न्यायिक समीक्षा के दायरे में भी आती है, जिससे हर बदलाव पर गहन संवैधानिक परीक्षण होता है।

यही कारण है कि भारत का संविधान समय के साथ बदलते हुए भी अपने मूल लोकतांत्रिक चरित्र को सुरक्षित रख पाया है। कठिन संशोधन प्रक्रिया इसे मज़बूत बनाती है, कमजोर नहीं।


नवीनतम पोस्ट



जानवर भूकंप से पहले कैसे जान लेते हैं?

जानवर भूकंप से पहले अजीब व्यवहार क्यों दिखाते हैं? यह लेख विज्ञान, सेंसर, कंपन, ध्वनि तरंगों और जानवरों की जैविक क्षमताओं के आधार पर इस रहस्य की गहराई से व्याख्या करता है।

अजंता-एलोरा की गुफाएँ कैसे बनीं?

अजंता–एलोरा की गुफाएँ कैसे बनीं और किस तकनीक से पहाड़ों को कला में बदला गया? इस लेख में प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग, विज्ञान, इतिहास और रहस्यों की गहराई से व्याख्या की गई है।

भारतीय इतिहास – सामान्य ज्ञान – भाग दो

वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (भारत) और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर...

लोग नाखुश होकर भी नौकरी क्यों नहीं छोड़ पाते?

लोग अक्सर नौकरी से खुश नहीं होते, फिर भी आर्थिक असुरक्षा, सामाजिक दबाव, आत्मविश्वास की कमी और भविष्य के डर के कारण बदलाव का जोखिम नहीं उठा पाते। यह मानसिक जड़ता उन्हें उसी स्थिति में बांधे रखती है।

🧬ना मरने वाला जीव कौन सा है?

क्या कोई जीव सच में अमर हो सकता है? जानिए उस रहस्यमयी जीव के बारे में जो कभी नहीं मरता, विज्ञान इसके पीछे क्या कहता है और यह खोज मानव भविष्य को कैसे बदल सकती है।

एटाकामा: धरती का सबसे सूखा स्थान

एटाकामा रेगिस्तान धरती का सबसे सूखा स्थान क्यों है? जानिए यहां वर्षों तक बारिश न होने का वैज्ञानिक कारण, अद्भुत जीवन, NASA के प्रयोग और वह रहस्य जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया।

मच्छर सिर्फ कुछ लोगों को ही क्यों काटते हैं?

मच्छर कुछ लोगों को ही ज़्यादा क्यों काटते हैं? यह लेख वैज्ञानिक शोध, शरीर की गंध, ब्लड ग्रुप, कार्बन डाइऑक्साइड और त्वचा के बैक्टीरिया के आधार पर इस रहस्य को स्पष्ट करता है।

कैलाश पर्वत का रहस्य

कैलाश पर्वत, कैलाश रेंज की सबसे ऊंची चोटी है। जो तिब्बत, नेपाल और भारत में फैली हुई है। इसके अलावा, यह चीन के तिब्बती...

धरती पर सबसे तेज़ हवा कहाँ चलती है?

धरती पर सबसे तेज़ हवा कहाँ और क्यों चलती है? जानिए अंटार्कटिका, जेट स्ट्रीम, तूफ़ानों और पृथ्वी के वायुमंडल के उस विज्ञान को, जो हवा को जानलेवा गति तक पहुँचा देता है।

भारत – सामान्य ज्ञान – भाग दो

1950 से भारत एक संघीय गणराज्य है। भारत की जनसंख्या 1951 में 36.1 करोड़ से बढ़कर 2011 में 121.1 करोड़ हो गई। प्रति व्यक्ति...

महान भारतीय वैज्ञानिक और उनके आविष्कार

भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महान वैज्ञानिकों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता और कठिन परिश्रम से देश...

भारतीय इतिहास – सामान्य ज्ञान – भाग एक

भारत का इतिहास कई हजार वर्ष पुराना माना जाता है। 65,000 साल पहले, पहले आधुनिक मनुष्य, या होमो सेपियन्स, अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्वीप में...

बिहार – सामान्य ज्ञान – भाग दो

सारण जिले में गंगा नदी के उत्तरी किनारे पर चिरांद, नवपाषाण युग (लगभग ४५००-२३४५ ईसा पूर्व) और ताम्र युग ( २३४५-१७२६ ईसा पूर्व) से...

कंप्यूटर नेटवर्क क्या होता है

कंप्यूटर नेटवर्क (Computer Network) एक तरीका है जिसके माध्यम से विभिन्न कंप्यूटर और उपकरण आपस में जुड़े होते हैं ताकि वे डेटा और संसाधनों...

सूरज कब और कैसे खत्म होगा?

सूरज तुरंत नहीं बल्कि अरबों वर्षों में समाप्त होगा। जब उसका हाइड्रोजन ईंधन खत्म होगा, तब वह लाल दानव बनेगा और अंततः अपने बाहरी हिस्से खोकर एक सफेद बौने तारे में बदल जाएगा।

भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता आज भी रहस्य क्यों है?

भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता आज भी रहस्य है क्योंकि उसकी लिपि अभी तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी, अचानक पतन के ठोस प्रमाण नहीं मिले और सीमित पुरातात्विक साक्ष्य कई प्रश्न अनुत्तरित छोड़ते हैं।

क्यों कौवे इंसानों को कभी नहीं भूलते?

क्या कौवे इंसानों को पहचान कर सालों तक याद रखते हैं? आधुनिक न्यूरोसाइंस और व्यवहारिक विज्ञान बताता है कि कौवों की याददाश्त, चेहरे पहचानने की क्षमता और सामाजिक बुद्धिमत्ता इंसानों को भी चौंका देती है।

विश्व सामान्य ज्ञान – भाग तीन

सामान्य ज्ञान विभिन्न मनोवैज्ञानिकों द्वारा परिभाषित किया गया है, जिसके अनुसार सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ज्ञान जो गैर विशेषज्ञ मीडिया की एक श्रृंखला द्वारा...

प्राचीन भारतीय सर्जरी: बिना मशीन

आधुनिक मशीनों से पहले भी भारत में जटिल सर्जरी होती थी। जानिए सुश्रुत संहिता, प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद ऑपरेशन और वह विज्ञान जिसने आज की मेडिकल साइंस की नींव रखी।

चींटियाँ रास्ता कभी कैसे नहीं भूलतीं?

क्या आपने कभी गौर किया है?जब चींटियाँ एक बार किसी रास्ते पर चलना शुरू कर देती हैं, तो वे उसी रास्ते पर बार-बार चलती...


error: Content is protected !!