
भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता को दुनिया आज सिंधु घाटी सभ्यता के नाम से जानती है। यह सभ्यता अपने समय से कहीं अधिक उन्नत थी, फिर भी इसके बारे में आज तक कई बुनियादी सवाल अनसुलझे हैं।
हजारों वर्ष पहले विकसित हुई यह सभ्यता सुव्यवस्थित नगर योजना, पक्की सड़कों, उन्नत जल निकासी प्रणाली और मानकीकृत ईंटों के लिए जानी जाती है। इसके बावजूद इसके लोगों का दैनिक जीवन आज भी पूरी तरह समझ में नहीं आया है।
इस सभ्यता का सबसे बड़ा रहस्य इसकी लिपि है। अब तक मिले सैकड़ों मुहरों और प्रतीकों के बावजूद वैज्ञानिक और इतिहासकार इस लिपि को पढ़ने में सफल नहीं हो पाए हैं।
लिपि के न पढ़े जाने के कारण हमें इस सभ्यता की राजनीति, धर्म, सामाजिक व्यवस्था और विचारधारा के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी नहीं मिल पाती। यही कारण है कि इसका इतिहास अधूरा प्रतीत होता है।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं है कि इतनी विकसित सभ्यता अचानक कैसे और क्यों समाप्त हो गई, जिससे इसके रहस्य और गहरे हो जाते हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता के रहस्य का सबसे बड़ा कारण इसकी लिपि है। अब तक लगभग चार हज़ार से अधिक मुहरें और प्रतीक मिले हैं, लेकिन किसी भी विद्वान ने इन्हें निश्चित रूप से पढ़ने में सफलता प्राप्त नहीं की है।
लिपि के अस्पष्ट रहने से यह तय नहीं हो सका कि इस सभ्यता की भाषा क्या थी, शासन प्रणाली कैसी थी और धार्मिक विश्वास किस रूप में मौजूद थे। यही अधूरी जानकारी इसे रहस्यमय बनाती है।
एक और बड़ा प्रश्न इस सभ्यता के पतन को लेकर है। कहीं बाढ़, कहीं सूखा, तो कहीं नदियों के मार्ग बदलने के प्रमाण मिलते हैं, लेकिन किसी एक कारण पर वैज्ञानिक सहमति नहीं बना पाए हैं।
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की असफलता ने धीरे-धीरे इस सभ्यता को कमजोर कर दिया, जबकि अन्य इसे आर्थिक और सामाजिक कारणों से जोड़ते हैं।
इस सभ्यता के लोगों द्वारा छोड़े गए सीमित अवशेष और लिखित इतिहास की अनुपस्थिति के कारण हर नया प्रमाण नए प्रश्न खड़े करता है, जिससे रहस्य और गहराता जाता है।

आधुनिक विज्ञान आज सिंधु घाटी सभ्यता के रहस्यों को सुलझाने के लिए नई तकनीकों का सहारा ले रहा है। डीएनए विश्लेषण, सैटेलाइट इमेजरी और भूगर्भीय अध्ययन इस दिशा में नए संकेत प्रदान कर रहे हैं।
हाल के शोध बताते हैं कि इस सभ्यता के लोग अचानक गायब नहीं हुए, बल्कि धीरे-धीरे अलग-अलग क्षेत्रों में फैल गए। इससे यह धारणा कमजोर पड़ती है कि किसी एक विनाशकारी घटना ने इसे समाप्त किया।
सूखी हुई नदियों के प्राचीन मार्गों की पहचान से यह भी संकेत मिलता है कि जल स्रोतों में बदलाव ने इस सभ्यता के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। फिर भी यह तय कर पाना कठिन है कि कौन सा कारण निर्णायक था।
सबसे बड़ा रहस्य आज भी इसकी लिपि बनी हुई है। जब तक यह लिपि पूरी तरह समझ में नहीं आती, तब तक इस सभ्यता की सोच, विश्वास और सामाजिक संरचना अधूरी ही रहेगी।
यही अधूरापन और अनुत्तरित प्रश्न भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता को आज भी रहस्य बनाकर रखते हैं और मानव इतिहास को समझने की हमारी जिज्ञासा को लगातार जीवित रखते हैं।

