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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

दुनिया की पहली सभ्यता कौन-सी थी और कैसे बनी?

सभ्यता का अर्थ क्या होता है?

जब इंसान ने शिकार और खानाबदोश जीवन छोड़कर एक जगह बसना शुरू किया, तभी सभ्यता की नींव पड़ी।

सभ्यता का मतलब केवल इमारतें या शहर नहीं होता, बल्कि एक संगठित समाज, नियम, परंपराएँ और सामूहिक जीवन शैली होती है।

मानव इतिहास में सबसे बड़ा मोड़

हज़ारों वर्षों तक इंसान जंगलों में घूमता रहा, शिकार करता रहा और प्रकृति पर पूरी तरह निर्भर था।

लेकिन जैसे ही इंसान ने खेती करना सीखा, उसने स्थायी जीवन की ओर पहला कदम बढ़ाया।

कृषि ने सभ्यता को कैसे जन्म दिया?

खेती ने इंसान को भोजन की स्थिरता दी। अब रोज़ शिकार की ज़रूरत नहीं रही।

इसी स्थिरता ने गाँवों, फिर कस्बों और अंततः शहरों को जन्म दिया।

नदियों के किनारे क्यों बसी पहली सभ्यताएँ?

प्राचीन काल में नदियाँ जीवन की रीढ़ थीं—पानी, उपजाऊ मिट्टी और यातायात का साधन।

इसीलिए दुनिया की शुरुआती सभ्यताएँ नदियों के आसपास विकसित हुईं।


दुनिया की पहली सभ्यता: सुमेर

इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, दुनिया की पहली विकसित सभ्यता सुमेरियन सभ्यता मानी जाती है।

यह सभ्यता लगभग 3500 ईसा पूर्व मेसोपोटामिया क्षेत्र में विकसित हुई थी, जो आज के इराक़ का हिस्सा है।

मेसोपोटामिया को “सभ्यता की जन्मभूमि” क्यों कहा जाता है?

मेसोपोटामिया का अर्थ होता है—“दो नदियों के बीच की भूमि”।

यह क्षेत्र टाइग्रिस और यूफ्रेटिस नदियों के बीच स्थित था, जहाँ उपजाऊ मिट्टी और भरपूर पानी उपलब्ध था।

इसी प्राकृतिक लाभ ने खेती, स्थायी बस्तियों और बड़े शहरों को जन्म दिया।

पहले शहर कैसे बने?

सुमेरियन सभ्यता ने दुनिया के पहले ज्ञात शहरों की स्थापना की।

उर, उरुक और लगाश जैसे शहर केवल आवास नहीं थे, बल्कि प्रशासन, व्यापार और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र थे।

यहाँ पहली बार संगठित सरकार, कर प्रणाली और श्रम विभाजन देखने को मिला।

लिखित भाषा का जन्म

सुमेरियन सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धि थी—लिखित भाषा

उन्होंने क्यूनिफॉर्म लिपि विकसित की, जिसमें मिट्टी की गोलियों पर प्रतीकों के माध्यम से लेखन किया जाता था।

यही लेखन प्रणाली आगे चलकर इतिहास, कानून और साहित्य की नींव बनी।

कानून, व्यापार और विज्ञान

सुमेरियन समाज में नियम और कानून लिखित रूप में मौजूद थे।

उन्होंने गणित, खगोल विज्ञान और समय मापन की शुरुआती अवधारणाएँ विकसित कीं—जैसे 60 सेकंड का एक मिनट।

व्यापार के लिए वजन, माप और मुद्रा जैसी प्रणालियाँ भी यहीं विकसित हुईं।

इसे “पहली” सभ्यता क्यों कहा जाता है?

सुमेरियन सभ्यता को पहली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ एक साथ ये सभी तत्व मौजूद थे—

स्थायी शहर, लेखन प्रणाली, संगठित शासन, कानून, व्यापार और वैज्ञानिक सोच।


सुमेरियन सभ्यता का पतन कैसे हुआ?

इतनी उन्नत होने के बावजूद सुमेरियन सभ्यता हमेशा के लिए नहीं टिक सकी।

इतिहासकारों के अनुसार, इसके पतन के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे थे—पर्यावरणीय बदलाव, आंतरिक संघर्ष और बाहरी आक्रमण।

नदियों की बाढ़ और बाद में सूखे ने खेती को प्रभावित किया, जिससे भोजन संकट पैदा हुआ।

आंतरिक संघर्ष और युद्ध

सुमेर के शहर-राज्य अक्सर आपस में युद्ध करते रहते थे।

इन संघर्षों ने संसाधनों को कमजोर किया और सभ्यता की एकता को तोड़ दिया।

बाद में अक्कादियन और अन्य बाहरी शक्तियों के आक्रमणों ने सुमेरियन सत्ता को समाप्त कर दिया।

सुमेर की सबसे बड़ी विरासत

हालाँकि सुमेरियन सभ्यता समाप्त हो गई, लेकिन इसकी विरासत आज भी जीवित है।

लिखित भाषा, कानून, गणित, समय मापन और शहरों की अवधारणा—इन सभी की जड़ें सुमेर में मिलती हैं।

आज हम जिस आधुनिक सभ्यता में रहते हैं, उसकी नींव इन्हीं शुरुआती प्रयोगों पर टिकी है।

दुनिया ने सुमेर से क्या सीखा?

सुमेरियन सभ्यता हमें सिखाती है कि मानव प्रगति सहयोग, ज्ञान और संगठन से होती है।

लेकिन यह भी दिखाती है कि पर्यावरणीय असंतुलन और आंतरिक संघर्ष किसी भी उन्नत समाज को कमजोर कर सकते हैं।

निष्कर्ष

दुनिया की पहली सभ्यता सुमेर केवल इतिहास का अध्याय नहीं है, बल्कि मानव विकास की शुरुआत की कहानी है।

यही वह जगह थी जहाँ इंसान ने पहली बार शहर बनाए, लिखा, गिना और संगठित समाज की नींव रखी।

आज की आधुनिक दुनिया को समझने के लिए सुमेर को समझना ज़रूरी है।


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