
क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है?
आप बिस्तर पर लेटे होते हैं, आँखें बंद होती हैं, नींद आने ही वाली होती है—और अचानक ऐसा लगता है जैसे आप कहीं से गिर रहे हों। उसी पल पूरा शरीर झटके से हिल जाता है और नींद टूट जाती है।
यह अनुभव इतना आम है कि लगभग हर इंसान ने इसे जीवन में कभी न कभी महसूस किया है। लेकिन इसके बावजूद यह सवाल बना रहता है—नींद आते-आते ऐसा झटका आखिर क्यों लगता है?
क्या यह कोई बीमारी है?
अधिकांश लोग इस झटके को देखकर डर जाते हैं और सोचते हैं कि कहीं यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं।
लेकिन विज्ञान कहता है कि ज़्यादातर मामलों में यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग के बीच तालमेल का एक सामान्य हिस्सा होता है।
इसे विज्ञान में क्या कहते हैं?
इस घटना को वैज्ञानिक भाषा में Hypnic Jerk या Sleep Start कहा जाता है।
यह आमतौर पर तब होता है जब हमारा दिमाग नींद की अवस्था में प्रवेश कर रहा होता है, लेकिन शरीर अभी पूरी तरह से रिलैक्स नहीं हुआ होता।
दिमाग और शरीर में टकराव
नींद आते समय दिमाग धीरे-धीरे जाग्रत अवस्था से नींद की अवस्था में जाता है। इस दौरान मांसपेशियाँ ढीली पड़ने लगती हैं और दिल की धड़कन धीमी हो जाती है।

तनाव और थकान का क्या रोल है?
नींद आते समय झटका लगने की संभावना तब बढ़ जाती है जब इंसान मानसिक रूप से तनाव में हो या अत्यधिक थका हुआ हो।
तनाव की स्थिति में दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पाता, जबकि शरीर नींद की तैयारी करने लगता है। यही असंतुलन अचानक झटके को जन्म देता है।
कैफीन और स्क्रीन का असर
चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक और देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप देखने से दिमाग ज़्यादा सक्रिय बना रहता है।
जब शरीर सोने की कोशिश करता है लेकिन दिमाग अभी भी सतर्क रहता है, तो Hypnic Jerk होने की संभावना बढ़ जाती है।
विकासवादी (Evolutionary) कारण
कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि यह झटका हमारे प्राचीन विकास से जुड़ा हुआ है।
जब इंसान पेड़ों पर सोता था, तब दिमाग यह सुनिश्चित करता था कि शरीर कहीं गिर न जाए। यह झटका उसी पुराने सुरक्षा तंत्र का अवशेष माना जाता है।
नींद के चक्र में क्या होता है?
नींद कई चरणों में होती है। Hypnic Jerk आमतौर पर पहले चरण में होता है, जब हम जाग्रत अवस्था से नींद में प्रवेश कर रहे होते हैं।
इस दौरान मांसपेशियों की गतिविधि और दिमाग की तरंगों में तेज़ बदलाव आता है, जिससे झटका महसूस हो सकता है।
क्या यह खतरनाक है?
अधिकांश मामलों में Hypnic Jerk पूरी तरह सामान्य और हानिरहित होता है।
लेकिन यदि यह बहुत बार हो रहा हो, नींद को प्रभावित कर रहा हो या डर पैदा कर रहा हो, तो यह नींद की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

नींद के झटके को कैसे कम किया जा सकता है?
हालाँकि Hypnic Jerk सामान्य है, लेकिन कुछ आदतों में बदलाव करके इसकी तीव्रता और आवृत्ति को कम किया जा सकता है।
सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का उपयोग कम करना, कैफीन से बचना और नियमित नींद का समय तय करना बेहद मददगार साबित होता है।
सोने से पहले क्या करें?
हल्की स्ट्रेचिंग, गहरी साँस लेने की तकनीक और शांत माहौल दिमाग को नींद के लिए तैयार करते हैं।
सोने से ठीक पहले भारी भोजन या अत्यधिक मानसिक गतिविधि से बचना भी ज़रूरी है।
कौन-सी बातें सिर्फ़ मिथक हैं?
अक्सर लोग मानते हैं कि नींद में झटका किसी हृदय रोग या तंत्रिका समस्या का संकेत है। अधिकांश मामलों में यह धारणा गलत होती है।
जब तक इसके साथ अन्य गंभीर लक्षण न हों, Hypnic Jerk को बीमारी नहीं माना जाता।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
यदि झटके बहुत ज़्यादा बार हों, नींद पूरी न होने दें या दिन में अत्यधिक थकान और डर पैदा करें, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होता है।
ऐसे मामलों में यह नींद से जुड़ी किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है।
निष्कर्ष
नींद आते-आते अचानक झटका लगना दिमाग और शरीर के तालमेल का एक सामान्य परिणाम है।
यह डरने की नहीं, बल्कि समझने की बात है कि हमारा शरीर नींद में कैसे प्रवेश करता है।
सही दिनचर्या और शांत आदतों के साथ इस अनुभव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
