
क्या आपने भी यह महसूस किया है?
एक ही कमरे में कई लोग बैठे हों, लेकिन मच्छर बार-बार किसी एक व्यक्ति को ही काटते रहते हैं। बाकी लोग आराम से बैठे रहते हैं और वही एक इंसान खुजली से परेशान होता है।
यह स्थिति लगभग हर घर में देखने को मिलती है। सवाल यह है—क्या यह केवल संयोग है, या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण छिपा है?
क्या मच्छर सच में “चुनते” हैं?
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मच्छर अंधाधुंध किसी को भी नहीं काटते। वे बहुत सोच-समझकर अपना शिकार चुनते हैं।
मच्छरों की सूँघने और महसूस करने की क्षमता बेहद तेज़ होती है। वे इंसान के शरीर से निकलने वाले कई संकेतों को पहचान सकते हैं।
मच्छर इंसान में क्या महसूस करते हैं?
मच्छर मुख्य रूप से खून नहीं, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड, शरीर की गंध और त्वचा से निकलने वाले रसायनों की ओर आकर्षित होते हैं।
जो व्यक्ति ज़्यादा मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है—जैसे भारी शरीर वाला व्यक्ति, गर्भवती महिला या तेज़ साँस लेने वाला इंसान—मच्छरों के लिए ज़्यादा आकर्षक बन जाता है।
क्या सभी लोगों का शरीर एक जैसा होता है?
हर इंसान के शरीर की गंध, पसीना और त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया अलग-अलग होते हैं।
कुछ लोगों की त्वचा ऐसे रसायन छोड़ती है जो मच्छरों को ज़्यादा आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि मच्छर बार-बार उन्हीं लोगों को निशाना बनाते हैं।

ब्लड ग्रुप का मच्छरों पर क्या असर पड़ता है?
वैज्ञानिक शोधों में यह पाया गया है कि मच्छर कुछ ब्लड ग्रुप्स की ओर ज़्यादा आकर्षित होते हैं। विशेष रूप से O ब्लड ग्रुप वाले लोगों को मच्छर अधिक काटते हैं।
इसके बाद A और B ब्लड ग्रुप आते हैं, जबकि AB ब्लड ग्रुप वाले लोग अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं। हालाँकि यह नियम सभी पर समान रूप से लागू नहीं होता।
पसीना और शरीर की गंध
मच्छर केवल पसीने की मात्रा नहीं, बल्कि उसमें मौजूद रसायनों को पहचानते हैं। लैक्टिक एसिड, यूरिक एसिड और अमोनिया जैसे तत्व मच्छरों को आकर्षित करते हैं।
जो लोग अधिक व्यायाम करते हैं या गर्म वातावरण में रहते हैं, उनके शरीर से निकलने वाली गंध मच्छरों को दूर से संकेत दे सकती है।
त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया
हर इंसान की त्वचा पर लाखों बैक्टीरिया रहते हैं। ये बैक्टीरिया त्वचा के रसायनों को तोड़कर अलग-अलग गंध पैदा करते हैं।
कुछ लोगों की त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया ऐसी गंध बनाते हैं जो मच्छरों को बहुत आकर्षक लगती है, जबकि दूसरों की गंध उन्हें कम आकर्षित करती है।
कपड़ों का रंग और शरीर का तापमान
मच्छर गहरे रंगों—जैसे काला, नीला और लाल—की ओर ज़्यादा आकर्षित होते हैं। हल्के रंग उन्हें कम दिखाई देते हैं।
इसके अलावा, जिनका शरीर का तापमान अधिक होता है, उनके आसपास मच्छर ज़्यादा मंडराते हैं।
तो मच्छर “चुनाव” कैसे करते हैं?
मच्छर एक साथ कई संकेतों को जोड़कर निर्णय लेते हैं—कार्बन डाइऑक्साइड, गंध, तापमान, रंग और त्वचा की रसायनिकी।
इसी कारण एक ही कमरे में बैठे दो लोगों में से एक को मच्छर बार-बार काटते हैं और दूसरे को लगभग नहीं।

क्या मच्छरों से पूरी तरह बचा जा सकता है?
अब तक यह स्पष्ट हो चुका है कि मच्छर किसी को भी यूँ ही नहीं काटते। वे शरीर से निकलने वाले संकेतों को पहचानकर अपना लक्ष्य चुनते हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि सही जानकारी और उपायों से मच्छरों के काटने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सबसे पहला और प्रभावी उपाय है—अपने आसपास के वातावरण को साफ़ रखना। रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण होता है।
कौन-से उपाय सच में काम करते हैं?
हल्के रंग के कपड़े पहनना, शरीर को ज़्यादा ढककर रखना और तेज़ खुशबू वाले परफ्यूम से बचना मच्छरों को दूर रखने में मदद करता है।
मच्छर-रोधी क्रीम और लोशन वैज्ञानिक रूप से प्रभावी माने जाते हैं, विशेष रूप से वे जिनमें DEET या प्राकृतिक रिपेलेंट्स शामिल हों।
घर में हवा का प्रवाह बनाए रखना भी उपयोगी है, क्योंकि मच्छर तेज़ हवा में उड़ने में असमर्थ होते हैं।
कौन-सी बातें सिर्फ़ मिथक हैं?
अक्सर यह माना जाता है कि मीठा खाने से मच्छर ज़्यादा काटते हैं, लेकिन इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
इसी तरह, केवल “खून मीठा होना” मच्छरों के आकर्षण का कारण नहीं होता। असल वजह शरीर की रसायनिकी और गंध होती है।
मच्छर हमें क्या सिखाते हैं?
मच्छरों का व्यवहार हमें यह समझने में मदद करता है कि प्रकृति कितनी सूक्ष्म संकेतों पर काम करती है।
एक छोटा सा कीट भी हमारे शरीर के अंदर होने वाली जैविक प्रक्रियाओं को पहचान सकता है—यह विज्ञान की दृष्टि से बेहद रोचक तथ्य है।
निष्कर्ष
मच्छर सिर्फ़ कुछ लोगों को इसलिए काटते हैं क्योंकि हर इंसान का शरीर अलग-अलग संकेत छोड़ता है।
ब्लड ग्रुप, पसीना, त्वचा के बैक्टीरिया, शरीर का तापमान और कपड़ों का रंग—ये सभी मिलकर मच्छरों के निर्णय को प्रभावित करते हैं।
सही जानकारी के साथ हम न केवल मच्छरों से बेहतर तरीके से बच सकते हैं, बल्कि प्रकृति की इस अद्भुत प्रणाली को भी समझ सकते हैं।
