
“किताब” का अर्थ क्या है?
जब हम पूछते हैं—पहली किताब किसने लिखी थी—तो सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि किताब से हमारा मतलब क्या है। क्या पत्थर या मिट्टी पर लिखा गया लेख किताब कहलाएगा? या केवल काग़ज़ पर बंधा हुआ ग्रंथ ही किताब है?
आधुनिक अर्थों में किताब वह होती है जिसमें विचारों को क्रमबद्ध रूप से लिखा गया हो और जिसे पढ़कर ज्ञान आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन प्राचीन काल में लिखने के माध्यम और उद्देश्य दोनों अलग थे।
इसी वजह से “पहली किताब” का उत्तर एक नाम या एक तारीख में सीमित नहीं किया जा सकता।
लेखन की शुरुआत कहाँ से हुई?
इतिहासकारों के अनुसार, सबसे पुरानी व्यवस्थित लेखन प्रणाली मेसोपोटामिया में विकसित हुई। यहाँ मिट्टी की गोलियों पर कीलाकार लिपि (Cuneiform) में लेख लिखे जाते थे।
इन लेखों में व्यापारिक रिकॉर्ड, कानून, धार्मिक अनुष्ठान और कहानियाँ दर्ज की जाती थीं। हालाँकि इन्हें आज की किताबों जैसा नहीं कहा जा सकता, लेकिन यही लिखित ज्ञान की पहली सीढ़ी थीं।
तो क्या पहली किताब मिट्टी पर लिखी गई थी?
कई विद्वानों का मानना है कि यदि “किताब” को ज्ञान-संग्रह के रूप में देखा जाए, तो मिट्टी की गोलियाँ ही मानव इतिहास की पहली किताबें थीं।
इनमें सबसे प्रसिद्ध रचना है गिलगमेश महाकाव्य (Epic of Gilgamesh), जिसे दुनिया का सबसे पुराना साहित्यिक ग्रंथ माना जाता है।
यह ग्रंथ अलग-अलग गोलियों पर लिखा गया था और सदियों तक मौखिक परंपरा के बाद लिखित रूप में संजोया गया।
पहली “लेखिका” का नाम
इतिहास में पहली ज्ञात लेखिका के रूप में एनहेडुआना (Enheduanna) का नाम लिया जाता है। वे लगभग 2300 ईसा पूर्व की एक कवयित्री और पुरोहिता थीं।
उनकी रचनाएँ धार्मिक भजनों के रूप में लिखी गईं और लेखक के नाम के साथ संरक्षित की गईं—जो उन्हें इतिहास की पहली पहचानी गई लेखिका बनाता है।

गिलगमेश महाकाव्य: दुनिया की सबसे पुरानी किताब?
यदि “पहली किताब” को लिखित साहित्य के रूप में देखा जाए, तो सबसे पहले नाम आता है गिलगमेश महाकाव्य का। यह महाकाव्य लगभग 2100 ईसा पूर्व सुमेरियन भाषा में मिट्टी की गोलियों पर लिखा गया था।
यह केवल एक कहानी नहीं थी, बल्कि जीवन, मृत्यु, मित्रता और अमरता जैसे गहरे प्रश्नों पर आधारित एक दार्शनिक ग्रंथ था। इसे अलग-अलग मिट्टी की गोलियों पर क्रमबद्ध रूप से लिखा गया—जो इसे “किताब” के सबसे करीब लाता है।
इसी कारण कई इतिहासकार इसे मानव सभ्यता की पहली साहित्यिक पुस्तक मानते हैं।
मिस्र की पपीरस किताबें
मेसोपोटामिया के साथ-साथ प्राचीन मिस्र में भी लिखित ग्रंथों का विकास हुआ। यहाँ पत्थर या मिट्टी के बजाय पपीरस नामक पौधे से बने काग़ज़ जैसे माध्यम पर लिखा जाता था।
मिस्र की प्रसिद्ध रचनाओं में “Book of the Dead” शामिल है, जो धार्मिक और आध्यात्मिक ग्रंथ था। यह मृत आत्मा की यात्रा को समझाने के लिए लिखा गया था।
पपीरस पर लिखी इन रचनाओं को लपेटकर रखा जाता था, जो आज की किताबों के प्रारंभिक रूप माने जा सकते हैं।
भारत की प्राचीन किताबें: वेद और भोजपत्र
भारत में प्रारंभिक ज्ञान का अधिकांश भाग मौखिक परंपरा के ज़रिए आगे बढ़ाया गया। वेदों को सदियों तक याद करके सिखाया गया, ताकि उनका शुद्ध रूप बना रहे।
बाद में इन्हें भोजपत्र और ताड़पत्र पर लिखा गया। ये पत्तों को सुखाकर बनाए जाते थे और धागों से बाँधकर पुस्तक का रूप देते थे।
इस रूप में भारत की धार्मिक और दार्शनिक रचनाएँ भी किताब की श्रेणी में आती हैं, हालाँकि उनका प्रारंभ मौखिक था।
चीन की शुरुआती किताबें
चीन में शुरुआती लेखन बाँस की पट्टियों और लकड़ी के टुकड़ों पर किया जाता था। इन पट्टियों को रस्सियों से बाँधकर ग्रंथ बनाए जाते थे।
बाद में काग़ज़ की खोज के बाद चीन में किताबों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और ज्ञान का प्रसार तेज़ी से होने लगा।
तो पहली किताब का फैसला कैसे किया जाए?
हर सभ्यता की अपनी परिभाषा और माध्यम थे। यदि मिट्टी की गोलियों को किताब माना जाए, तो मेसोपोटामिया सबसे आगे है। यदि पन्नों और बंधे हुए रूप को देखें, तो मिस्र और चीन प्रमुख बनते हैं।
इसी कारण “पहली किताब” का उत्तर सभ्यता, माध्यम और परिभाषा के अनुसार बदल जाता है।

तो पहली किताब वास्तव में किसने लिखी?
इस सवाल का एक ही नाम या तारीख देना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा। “पहली किताब” का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि हम किताब को कैसे परिभाषित करते हैं।
यदि हम ज्ञान को क्रमबद्ध रूप से लिखे गए ग्रंथ के रूप में देखें, तो मेसोपोटामिया की मिट्टी की गोलियाँ और विशेष रूप से गिलगमेश महाकाव्य मानव इतिहास की पहली किताबों में गिनी जा सकती हैं।
यदि लेखक की पहचान के साथ लिखी गई रचना को मापदंड बनाया जाए, तो इतिहास की पहली ज्ञात लेखिका एनहेडुआना मानी जाती हैं।
पहली किताब का महत्व क्या था?
पहली किताब ने केवल शब्दों को सुरक्षित नहीं किया, बल्कि मानव अनुभव को समय के पार पहुँचाया। इससे पहले ज्ञान केवल स्मृति और मौखिक परंपरा पर निर्भर था।
लिखित शब्दों ने विचारों को स्थायी बना दिया। कानून, विज्ञान, धर्म और दर्शन—सब कुछ पीढ़ियों तक सुरक्षित रहने लगा।
यही कारण है कि पहली किताब को मानव सभ्यता की सबसे निर्णायक उपलब्धियों में गिना जाता है।
किताब ने मानव सोच को कैसे बदला?
किताबों ने इंसान को पहली बार यह क्षमता दी कि वह अपने विचारों को समय और स्थान से मुक्त कर सके।
अब ज्ञान केवल शिक्षक से शिष्य तक सीमित नहीं रहा—बल्कि समाज, सभ्यताओं और महाद्वीपों में फैलने लगा।
इसी प्रक्रिया ने विज्ञान, शिक्षा और लोकतंत्र की नींव रखी।
निष्कर्ष
पहली किताब किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि मानव जिज्ञासा की सामूहिक उपलब्धि थी।
अलग-अलग सभ्यताओं ने अलग-अलग रूपों में किताब को जन्म दिया—और यही विविधता मानव इतिहास की सबसे बड़ी ताकत है।
आज डिजिटल युग में भी, किताबें हमें याद दिलाती हैं कि ज्ञान की असली शक्ति उसे सहेजने और साझा करने में है।
