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रबीन्द्रनाथ टैगोर

कवि

रबीन्द्रनाथ टैगोर (७ मई, १८६१ – ७ अगस्त, १९४१) - विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

इंसान सपने क्यों देखता है? विज्ञान का जवाब

हर इंसान सपने क्यों देखता है?

नींद में कभी हम उड़ते हुए दिखाई देते हैं, कभी किसी पुराने दोस्त से मिलते हैं और कभी ऐसी घटनाएँ देखते हैं जो असल ज़िंदगी में संभव ही नहीं होतीं। ये सभी अनुभव सपनों के रूप में सामने आते हैं।

लगभग हर इंसान सपने देखता है, लेकिन जागने के बाद कई लोग उन्हें याद नहीं रख पाते। इसके बावजूद यह सवाल हमेशा बना रहता है—आख़िर इंसान सपने क्यों देखता है?

क्या सपने सिर्फ़ कल्पना हैं?

लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि सपने केवल दिमाग की बेतरतीब गतिविधि हैं। लेकिन आधुनिक विज्ञान इस सोच से आगे बढ़ चुका है।

आज वैज्ञानिक मानते हैं कि सपनों का सीधा संबंध दिमाग की कार्यप्रणाली, यादों और भावनाओं से होता है।

नींद और दिमाग का गहरा रिश्ता

जब हम सोते हैं, तो हमारा दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता। बल्कि कुछ हिस्से अत्यंत सक्रिय हो जाते हैं।

इसी सक्रियता के दौरान दिमाग तस्वीरें, आवाज़ें और भावनाएँ पैदा करता है—जिन्हें हम सपनों के रूप में अनुभव करते हैं।

क्या सपने किसी काम आते हैं?

वैज्ञानिकों के अनुसार सपने दिमाग के लिए बेकार नहीं होते। वे हमारी यादों को व्यवस्थित करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।


REM नींद क्या होती है?

नींद को वैज्ञानिक कई चरणों में बाँटते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण चरण है REM Sleep (Rapid Eye Movement)।

इसी चरण में आँखें तेज़ी से हिलती हैं, दिमाग अत्यंत सक्रिय होता है और सबसे vivid सपने आते हैं।

सपने REM चरण में ही क्यों आते हैं?

REM नींद के दौरान दिमाग के वे हिस्से सक्रिय हो जाते हैं जो कल्पना, दृश्य निर्माण और भावनाओं से जुड़े होते हैं।

इस समय तर्क और नियंत्रण से जुड़े हिस्से अपेक्षाकृत शांत रहते हैं, इसलिए सपने अक्सर अजीब और अवास्तविक लगते हैं।

यादों को व्यवस्थित करने में सपनों की भूमिका

वैज्ञानिक मानते हैं कि सपने दिन भर की यादों को छाँटने और व्यवस्थित करने में मदद करते हैं।

महत्वपूर्ण अनुभव मजबूत यादों में बदल जाते हैं, जबकि गैर-ज़रूरी जानकारी धीरे-धीरे मिट जाती है।

भावनाओं और मानसिक संतुलन

सपने केवल यादों से नहीं, बल्कि भावनाओं से भी गहराई से जुड़े होते हैं।

डर, खुशी, तनाव या दुख—ये सभी भावनाएँ सपनों में अलग-अलग रूप में सामने आ सकती हैं।

कुछ शोध बताते हैं कि सपने भावनात्मक तनाव को कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।

दिमाग की रसायनिकी का खेल

REM नींद के दौरान कुछ न्यूरोकेमिकल्स बढ़ जाते हैं और कुछ कम हो जाते हैं।

इसी असंतुलन के कारण सपने भावनात्मक तो होते हैं, लेकिन पूरी तरह तार्किक नहीं।


सपनों के प्रकार कौन-कौन से होते हैं?

सभी सपने एक जैसे नहीं होते। विज्ञान के अनुसार सपनों को उनके अनुभव और प्रभाव के आधार पर कई श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।

कुछ सपने सामान्य होते हैं, कुछ बहुत भावनात्मक, जबकि कुछ डरावने या भ्रमित करने वाले भी हो सकते हैं।

बुरे सपने क्यों आते हैं?

बुरे सपनों का संबंध अक्सर तनाव, डर, अधूरी भावनाओं और मानसिक दबाव से होता है।

दिमाग नींद के दौरान इन्हीं भावनाओं को प्रोसेस करता है, जिससे डरावने दृश्य सपनों में बदल जाते हैं।

Lucid Dream क्या होता है?

कुछ लोगों को सपने में यह एहसास हो जाता है कि वे सपना देख रहे हैं। इसे Lucid Dream कहा जाता है।

इस अवस्था में व्यक्ति सपने को आंशिक रूप से नियंत्रित भी कर सकता है। यह दिमाग और चेतना के रिश्ते को समझने में वैज्ञानिकों के लिए बेहद रोचक विषय है।

क्या सपने भविष्य बताते हैं?

विज्ञान इस धारणा का समर्थन नहीं करता कि सपने भविष्यवाणी करते हैं।

हालाँकि कभी-कभी सपनों में दिखाई देने वाली घटनाएँ संयोग से सच हो सकती हैं, लेकिन इसका कारण भविष्य देखना नहीं, बल्कि दिमाग का अनुभवों को जोड़ना होता है।

निष्कर्ष

इंसान सपने इसलिए देखता है क्योंकि दिमाग नींद के दौरान भी सक्रिय रहता है।

सपने यादों को व्यवस्थित करने, भावनाओं को संतुलित करने और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करते हैं।

वे रहस्यमय ज़रूर लगते हैं, लेकिन उनके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं।


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